नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन की बीपी, रूस की रोसनेफ्ट, सदी आर्मको और ओएनजीसी, आईओसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत शीर्ष वैश्विक तथा भारतीय कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के साथ आज बैठक की। इस बैठक का मकसद तेल एवं गैस खोज एवं उत्पादन क्षेत्र में निवेश को गति देना है।
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मोदी ने बीपी पीएलसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बॉब डुडले, रोसनेफ्ट के सीईओ इगोर सेचिन, रॉयल डच शेल की परियोजना एवं प्रौद्योगिकी निवेशक हैरी ब्रेकेलमेन्स, सदी आर्मको के मुख्य कार्यपालक अमीन एच नासीर, एक्सॉन मोबिल के गैस और बिजली क्षेत्र के अध्यक्ष रॉब फ्रैंकलिन, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और वेदांता रिर्सोसेज के प्रमुख अनिल अग्रवाल के अलावा सार्वजिनक क्षेत्र की ओएनजीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शशि शंकर और इंडियन आयल के चेयरमैन संजीव सिंह सहित विभन्न कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात की और वैश्विक तेल एवं गैस परिदृश्य पर चर्चा की। बैठक दो घंटे से अधिक समय चली।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य विषय तेल एवं गैस क्षेत्र में खोज एवं उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन एवं वितरण नेटवर्क में निवेश को बढ़ावा देना है। नीति आयोग ने बैठक में क्षेत्र के बारे में 2030 तक मांग एवं आपूर्ति की स्थिति तथा सरकार की मौजूदा नीतियों के संदर्भ में प्रस्तुतिकरण दिया।
बैठक में धर्मेंद्र प्रधान के अलावा बिजली एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह और नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार भी शामिल हुए। इसके अलावा नीति आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और विा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। मोदी की तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ यह दूसरी बैठक है।
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इससे पहले, जनवरी 2016 में पहली बैठक हुई थी। उस बैठक में प्राकृतिक गैस कीमतों में सुधार का सुझााव दिया गया। एक साल से अधिक समय के बाद सरकार ने गहरे सागर जैसे कठिन क्षेत्रों में उत्पादित क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमत की अनुमति दे दी। सरकार घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने के लिये निजी निवेश बढ़ाने पर गौर कर रही है। पिछले कुछ साल से उत्पादन स्थिर है जबकि मांग में सालाना 5 से 6 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।
भारत कच्चे तेल की कुल मांग का 80 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का आधे से अधिक को पूरा करने के लिये आयात पर निर्भर है। प्रधानमंत्री ने 2015 में तेल आयात पर निर्भरता 2022 तक 10 प्रतिशत घटाकर 67 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है जो 2014-15 में 77 प्रतिशत था।
उसके बाद से आयात घटने के बजाए बढ़ा है। सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर गौर कर रही है।
ओपेक के महासचिव मोहम्मद बारकिंडो और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी बैठक में शामिल हुए। बैठक के लिये पूर्व पेट्रोलियम सचिव विवेक राय और विजय केलकर को भी आमंत्रित किया गया था। प्रधान ने कहा कि भारत में अगले 10 साल में तेल एवं गैस क्षेत्र में 300 अरब डालर के निवेश के अवसर हैं। उन्होंने कहा, हम ऐसे घरेलू और वैश्विक निवेशक चाहते हैं जो बेहतर प्रौद्योगिकी और पूंजी ला सके। सरकार ऊर्जा में गैस की हिस्सेदारी मौजूदा 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना चाहती है।
प्रधान ने कहा कि,
हम गैस ट्रेडिंग एक्सचेंज की योजना बना रहे हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि गैस ग्रिड तक खुली पहंच हो। इस क्षेत्र में वैश्विक अनुभव उपयोगी होगा।
मंत्री के अनुसार, पिछले 40 महीनों में सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में कई नीतिगत पहल की है जो प्रधानमंत्री के ऊर्जा पहुंच, कुशलता, टिकाउपन और सुरक्षा के दृष्टिकोण के अनुरूप है। बैठक में गेल इंडिया इंडिया के प्रमुख बी सी त्रिपाठी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशल लि. के चेयरमैन मुकेश कुमार सुराना, ऑयल इंडिया के चेयरमैन उत्पल बोरा और भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लि. के चेयरमैन डी राजकुमार भी शामिल हुए।