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Saudi Aramco की रास तनुरा रिफाइनरी को अटैक के बाद किया गया बंद, दुनिया पर कितना होगा इसका असर?

 Published : Mar 02, 2026 01:31 pm IST,  Updated : Mar 02, 2026 01:33 pm IST

अगर यह बंदी अस्थायी और एहतियाती है तो असर सीमित रहेगा। लेकिन अगर यह लंबी अवधि तक जारी रहती है, तो तेल की कीमतों में तेज उछाल, महंगाई और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

Saudi Aramco की एक रिफाइनरी।- India TV Hindi
Saudi Aramco की एक रिफाइनरी। Image Source : PTI

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की रास तनूरा रिफाइनरी को सोमवार सुबह कथित ड्रोन हमले की आशंका के बाद एहतियातन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला पूरी तरह सावधानी के तहत लिया गया है और हालात नियंत्रण में हैं। खबर है कि रिफाइनरी परिसर में एक छोटा और सीमित आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसे तुरंत काबू में कर लिया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पत्रकार ने बताया कि इस घटना में न तो कोई हताहत हुआ और न ही बड़े पैमाने पर नुकसान की सूचना है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में शुमार इस संयंत्र में किसी गंभीर क्षति की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

रिफाइनरी लंबे समय तक बंद होने पर क्या होगा असर

अगर सऊदी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी लंबे समय के लिए बंद हो जाती है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ सकता है। रास तनूरा सऊदी अरब की सबसे बड़ी और पुरानी रिफाइनरियों में से एक है, जिसकी प्रोसेसिंग क्षमता लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) है। यह न केवल एक प्रमुख रिफाइनिंग हब है, बल्कि सऊदी तेल निर्यात का अहम केंद्र भी है। आइए, समझते हैं कैसे यह लंबे समय तक बंद रहने पर असर डाल सकती है।

ईंधन-कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

दुनिया की प्रमुख रिफाइनरियों में शामिल इस संयंत्र के बंद होने से पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे प्रोसेस्ड उत्पादों की सप्लाई घट सकती है। इससे ब्रेंट और WTI जैसे बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा होने से आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा।

वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव

सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में है और रास तनूरा निर्यात टर्मिनल के रूप में भी अहम भूमिका निभाता है। एशिया (विशेषकर भारत, चीन, जापान), यूरोप और अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित होने से शिपिंग, एयरलाइंस, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है।

शेयर बाजारों में अस्थिरता

ऊर्जा कीमतों में तेजी से महंगाई का खतरा बढ़ेगा, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आ सकती है। निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों - जैसे सोना और अमेरिकी डॉलर - की ओर रुख कर सकते हैं। ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार की धारणा नकारात्मक हो सकती है।

महंगाई और ब्याज दरों पर प्रभाव

तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिससे महंगाई तेज हो सकती है। ऐसे में प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या और बढ़ाने का फैसला कर सकते हैं। इससे आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने और मंदी का जोखिम बढ़ सकता है।

भू-राजनीतिक तनाव में इजाफा

अगर रिफाइनरी का बंद होना किसी हमले या सुरक्षा घटना के कारण है, तो मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य या Strait of Hormuz जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग पर जोखिम बढ़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और गहराएगी। इससे अन्य उत्पादक देशों की ऊर्जा सुविधाओं पर भी खतरे की आशंका बढ़ सकती है।

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