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क्या होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत में पेट्रोल-डीजल की हो जाएगी किल्लत? जानें सबसे खराब स्थिति क्या होगी?

 Published : Mar 03, 2026 02:59 pm IST,  Updated : Mar 03, 2026 02:59 pm IST

भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरत का लगभग 88% हिस्सा आयात करता है। जानकार मानते हैं कि अगर होर्मुज रूट बंद होता है, तो भारत वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हो सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य जहां से गुजरते हैं तेल टैंकर के जहाज।- India TV Hindi
होर्मुज जलडमरूमध्य जहां से गुजरते हैं तेल टैंकर के जहाज। Image Source : SCREENSHOT FROM POLESTAR GLOBAL PURPLETR

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एनर्जी एनालिटिक्स फर्म Kpler के अनुसार, भारत के पास वाणिज्यिक कच्चे तेल का भंडार लगभग 100 मिलियन बैरल (10 करोड़ बैरल) है। इसमें स्टोरेज टैंकों, भूमिगत रणनीतिक भंडार और समुद्र में भारत की ओर आ रहे जहाजों पर मौजूद तेल शामिल है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो जाती है, तो यह भंडार 40-45 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की निर्भरता

भारत अपनी कुल कच्चे तेल आवश्यकता का लगभग 88% आयात करता है। इसमें से 50% से अधिक (कुछ अनुमानों में 55% तक) मध्य पूर्वी देशों (मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत) से आता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। Kpler के डेटा के मुताबिक, भारत के कुल कच्चे तेल आयात का औसतन 2.5-2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन इसी संकरे मार्ग से आता है, जो कुल आयात का लगभग आधा है। यह मार्ग वैश्विक समुद्री कच्चे तेल निर्यात का लगभग 20-21% और एलएनजी शिपमेंट का 20% वहन करता है। भारत के लिए यह न सिर्फ तेल, बल्कि कतर से आने वाली एलएनजी के लिए भी महत्वपूर्ण है।

रणनीतिक भंडार की स्थिति

भारत के SPR मुख्य रूप से तीन स्थानों पर हैं:

विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
मैंगलोर (कर्नाटक)
पाडुर (कर्नाटक)
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ये भंडार 74 दिनों तक की कवरेज प्रदान कर सकते हैं (केवर्न + रिफाइनरी स्टॉक + अन्य शामिल करके), लेकिन Kpler जैसे एनालिटिक्स फर्म होर्मुज-विशेष परिदृश्य में 40-45 दिनों का अनुमान लगाते हैं, क्योंकि यह केवल वाणिज्यिक स्टॉक पर फोकस करता है। ये रिजर्व अस्थायी झटकों के लिए डिजाइन किए गए हैं, न कि लंबे समय तक पूर्ण बंदी के लिए।

कीमतों पर तत्काल प्रभाव

ईरान संकट के बाद वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो हाल के दिनों में 10% तक की बढ़ोतरी दर्शाती है (कुछ रिपोर्टों में $77-82 के बीच उतार-चढ़ाव)। भारत के लिए इसका सीधा असर आयात बिल पर पड़ता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कच्चे तेल आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-जनवरी) में 206.3 मिलियन टन आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। कीमतों में उछाल से आयात बिल और महंगाई बढ़ने का खतरा है।

संकट की पृष्ठभूमि

हाल ही में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से प्रतिक्रिया दी। इससे होर्मुज में टैंकर ट्रैफिक प्रभावित हुआ है-कुछ रिपोर्टों में मार्ग पर पूर्ण या आंशिक बंदी की बात कही जा रही है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट है।

उपलब्ध विकल्प क्या हैं?

अगर होर्मुज मार्ग बाधित होता है, तो भारत वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हो सकता है। रूस - जहाजों में तैरते रूसी कार्गो (अरब सागर/एशियाई क्षेत्र में उपलब्ध) को तुरंत खरीदा जा सकता है। पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, और अमेरिका से आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है। घरेलू स्तर पर रिफाइनरियों से पेट्रोलियम उत्पादों (डीजल, जेट फ्यूल) के निर्यात को सीमित कर घरेलू बाजार को प्राथमिकता दी जा सकती है। 2024-25 में भारत ने 23.7 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए, जो कुल खपत का करीब 10% है। हालांकि, लंबे मार्ग से आने वाले जहाजों पर फ्रेट, बीमा और जियोपॉलिटिकल प्रीमियम बढ़ेगा, जिससे लागत में इजाफा होगा।

सबसे खराब स्थिति में क्या हो सकता है?

अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ($100/बैरल तक संभावना) देखने को मिल सकता है। फ्रेट बाजार पर दबाव होगा। रिफाइनरियों को उत्पादन घटाना पड़ सकता है। अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर (महंगाई, आयात बिल, रुपया कमजोर) देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कम संभावना लेकिन उच्च प्रभाव वाला जोखिम है। फिलहाल तात्कालिक खतरा भौतिक कमी से ज्यादा कीमतों में अस्थिरता और बढ़ते आयात बिल का है। भारत के पास विविध स्रोत और कुछ बफर हैं, लेकिन लंबी बाधा अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकती है।सरकार और रिफाइनरियां वैकल्पिक आपूर्ति और स्टॉक प्रबंधन पर नजर रख रही हैं ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।

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