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पश्चिम एशिया में हालात नहीं सुधरे तो भारत के निवेश पर पड़ सकता है बुरा असर, GDP भी हो सकती है प्रभावित

Edited By: Sunil Chaurasia Published : Mar 03, 2026 03:58 pm IST, Updated : Mar 03, 2026 04:25 pm IST

बीएमआई ने अपनी 'इंडिया आउटलुक' रिपोर्ट में कहा कि अगर ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो इससे भारत के जीडीपी पर लगभग 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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Photo:AP वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.00 प्रतिशत पर बरकरार

फिच ग्रुप की यूनिट BMI ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत में निवेश को प्रभावित कर सकता है। बीएमआई ने कहा कि ये यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों से मिलने वाले सकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। बीएमआई ने अपनी 'इंडिया आउटलुक' रिपोर्ट में कहा कि अगर ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो इससे भारत के जीडीपी पर लगभग 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है। रिपोर्ट कहती है कि खासकर दक्षिण एशिया जैसे शुद्ध तेल आयातक देशों पर इस संकट का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने का अनुमान है। 

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.00 प्रतिशत पर बरकरार

हालांकि, शोध एवं विश्लेषण इकाई बीएमआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.00 प्रतिशत पर बरकरार रखा है, जो चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.9 प्रतिशत वृद्धि से कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से अनिश्चितता में तेज वृद्धि हो सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष से निवेश धारणा प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट कहती है, "मार्च से अनिश्चितता में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका है। हमें लगता है कि इससे भारत में निवेश हतोत्साहित होगा, जिससे ईयू और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का सकारात्मक प्रभाव आंशिक रूप से कम हो सकता है।" 

अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर शुरू किया था हमला

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन एवं मिसाइलें दागीं। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी। ये संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ेगा और ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा। 

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