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फ्लेक्‍सी फेयर सिस्‍टम से रेलवे को नहीं होगी ज्‍यादा आमदनी, यात्रियों को करना होगा परेशानी का सामना

फ्लेक्‍सी फेयर सिस्‍टम से रेलवे की आय में कोई खास फर्क पड़ने की संभावना नहीं है पर इससे यात्रियों का खर्च बढ़ने के साथ समस्या जरूर बढ़ेगी।

Abhishek Shrivastava
Published : Sep 09, 2016 07:07 pm IST, Updated : Sep 09, 2016 07:07 pm IST
फ्लेक्‍सी फेयर सिस्‍टम से रेलवे को नहीं होगी ज्‍यादा आमदनी, यात्रियों को करना होगा परेशानी का सामना- India TV Paisa
फ्लेक्‍सी फेयर सिस्‍टम से रेलवे को नहीं होगी ज्‍यादा आमदनी, यात्रियों को करना होगा परेशानी का सामना

नई दिल्‍ली। राजधानी, शताब्‍दी और दुरंतो ट्रेन में फ्लेक्‍सी फेयर सिस्‍टम (मांग बढ़ने के साथ किराये में वृद्धि की योजना) से रेलवे की आय में कोई खास फर्क पड़ने की संभावना नहीं है पर इससे यात्रियों का खर्च बढ़ने के साथ समस्या जरूर बढ़ेगी। यह बात रेल-यात्रियों को एप आधारित विभिन्न सेवाएं देने वाली कंपनी रेलयात्री डॉट इन ने अपने एक विश्लेषण में कही है। वहीं, रेल टिकट एजेंसी चलाने वाले लाइसेंसधारकों ने नई प्रणाली के पहले दिन टिकट की दरों में बार-बार परिवर्तन के कारण ग्राहकों के साथ विवाद खड़ा होने की शिकायत की है।

रेलयात्री डॉट इन के सह-संस्थापक कपिल रायजादा ने एक विश्लेषण में कहा कि सर्ज प्राइसिंग जिन गाडि़यों में लागू की जा रही है उनकी संख्या सीमित है, लिहाजा उससे रेलवे की आय में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ने वाला। उन्होंने त्‍योहारी सीजन में इस प्रकार के कदम उठाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। रेलयात्री डॉट इन के विश्लेषण में कहा गया है कि सिर्फ इन तीन प्रकार की गाडि़यों पर गतिशील किराये की पेशकश से रेलवे को राजस्व के लिहाज से कोई अधिक फायदा नहीं होने वाला क्योंकि इन प्रीमियम गाडि़यों की संख्या लगभग 300 ही है। रेलवे से लाइसेंस लेकर आरक्षित टिकटों का कारोबार करने वाली निजी एजेंसियों के संगठन यात्री टिकट सुविधा केंद्र एसोसिशन, दिल्ली क्षेत्र के महासचिव आरके बंसल ने इस योजना की आलोचना करते हुए कहा, इसमें अभी किराया कुछ है और थोड़ी देर बाद कुछ हो जाता है, जिससे ग्राहक और बुकिंग करने वाले दोनों परेशान हैं।

रेल ट्रेवलर सर्विस एजेंट्स एसोसिएशन के सचिव (दिल्ली) दयाशंकर भटनागर ने कहा, हम टिकट बुकिंग कराने वालों को पक्का किराया नहीं बता पा रहे हैं, बुकिंग के दौरान किराया बढ़ जाने पर यात्रियों से विवाद उत्पन्न हो रहा है। इसके अलावा वेटिंग टिकट को लेकर अभी भ्रम है कि उसके कन्फर्म होने पर उसपर क्या कोई अतिरिक्त किराया लगेगा या नहीं। रेलयात्री डॉट इन के विश्लेषण में कहा गया है किसी भी तरह 90 फीसदी यात्रियों को टिकट के लिए अधिक भुगतान करना पड़ेगा। कैंसिलेशन को भी साथ लें तो ऊंचा किराया देने वालों का अनुपात 100 फीसदी के करीब पहुंच जाएगा। इससे अच्छा होता सरकार किराये में 25 फीसदी की एक समान वृद्धि कर देती। इससे यात्रियों पर एक समान बोझ पड़ता और यात्रियों को जल्दी टिकट बुक कराने की चिंता से गुजरना नहीं पड़ता। रायजादा ने कहा, सर्ज प्राइसिंग से स्लीपर क्लास के टिकट की कीमतों पर भी असर पड़ेगा जबकि फर्स्‍ट एसी और एक्जीक्यूटिव क्लास को इससे छूट दी गई है।

 

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