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भारतीय अर्थव्यवस्था के बीते सबसे बुरे दिन, DEA ने कहा प्रमुख संकेतकों में दिख रहा है सुधार

गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी से किसानों को लगभग 75,000 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में निजी उपभोग को बढ़ावा मिलेगा।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: August 05, 2020 11:31 IST
Worst seems to be over for Indian economy,says DEA report- India TV Paisa
Photo:THEECONOMISTTIMES

Worst seems to be over for Indian economy,says DEA report

नई दिल्ली। देश में चरणबद्ध तरीके से अनलॉक की प्रक्रिया चल रही है और आर्थिक गतिविधियों को क्रमबद्ध तरीके से अनुमति दी जा रही है। ऐसे में आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में कहा गया है कि लगता है अर्थव्यवस्था का सबसे बुरा वक्त बीत चुका है, क्योंकि प्रमुख संकेतकों में सुधार दिख रहा है।

मंगलवार को जारी जुलाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई), विद्युत उत्पादन, इस्पात और सीमेंट उत्पादन, रेलवे माल ढुलाई, प्रमुख बंदरगाहों पर यातायात, ई-वे बिल जनरेशन के अलावा अन्य संकेतक दिखाते हैं कि आर्थिक गतिविधियां जोर पकड़ रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अनलॉकिंग के साथ लगता है सबसे बुरा वक्त समाप्त हो गया, क्योंकि उच्च तीव्रता वाले संकेतक अप्रैल 2020 में बुरी तरह प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था में सुधार दिखाते हैं। रिपोर्ट में हालांकि कहा गया है कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों और राज्यों में बीच-बीच में हो रहे लॉकडाउन के कारण जोखिम की स्थिति बनी हुई है। इसमें कहा गया है कि वृद्धि में तेजी आने वाले महीनों में ग्रामीण भारत से मिलेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य मानसून के अनुमान के आधार पर कृषि क्षेत्र वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामारी के असर को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि समय पर और सक्रियता के साथ इस सेक्टर के लिए लॉकडाउन में छूट देने से रबी फसलों की कटाई सुगमता से हो पाई और खरीब की बुवाई भी बढ़ी है।

इसमें कहा गया है कि गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी से किसानों को लगभग 75,000 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में निजी उपभोग को बढ़ावा मिलेगा। सितंबर, 2019 से व्यापार की शर्ते कृषि क्षेत्र के पक्ष में मुड़ी हैं और ग्रामीण मांग बढ़ी है।

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