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डिजिटल लेनदेन में बड़ा उछाल, UPI से शहरों में भुगतान 30% तो गांवों में इतना फीसदी बढ़ा

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Jul 08, 2024 06:24 am IST,  Updated : Jul 08, 2024 06:24 am IST

सर्वे के मुताबिक, गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र की इकाइयों की औसत फिक्स्ड एसेट्स की वैल्यू 2022-23 में 3.18 लाख रुपये रही है, जो पहले 2.81 लाख रुपये थी, जो दर्शाता है कि इस सेक्टर में पूंजीगत निवेश बढ़ा है।

UPI- India TV Hindi
यूपीआई Image Source : FILE

भारत में छोटे दुकानदारों और फर्म की ओर से ऑर्डर लेने या देने के लिए बड़ी संख्या में डिजिटल माध्यम का उपयोग किया जा रहा है। इसकी वजह यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) जैसी सुविधाों का समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी सर्वे के अनुसार, यूपीआई से भुगतान करने या ऑनलाइन ऑर्डर देने के रूप में बिजनेस उद्देश्य के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल 2022-23 के बीच ग्रामीण इलाकों में बढ़कर 13.5 प्रतिशत हो गया है, जो पहले 7.7 प्रतिशत था। वहीं, शहरी इलाकों में यह बढ़कर 30.2 प्रतिशत हो गया है, जो पहले 21.6 प्रतिशत पर था। इस तरह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संयुक्त रूप से 7.2 प्रतिशत की बढ़त हुई है।

डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपना रहे लोग

यह दिखाता है कि असंगठित क्षेत्र में डिजिटल पेमेंट को लोग अपना रहे हैं और आईटी एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सर्वे के मुताबिक, असंगठित क्षेत्र में अनुमानित प्रतिष्ठानों की संख्या में 5.88 प्रतिशत, कर्मचारियों की संख्या में 7.84 प्रतिशत और ग्रॉस वैल्यू एडिशन में 9.83 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। सर्वे में आगे बताया गया कि सेक्टर में पूंजीगत निवेश बढ़ा है, लोन तक लोगों की पहुंच बढ़ी है और आईटी के उपयोग में भी इजाफा देखा गया है।

लोगों के लिए लोन की उपलब्धता बढ़ी

सर्वे के मुताबिक, गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र की इकाइयों की औसत फिक्स्ड एसेट्स की वैल्यू 2022-23 में 3.18 लाख रुपये रही है, जो पहले 2.81 लाख रुपये थी, जो दर्शाता है कि इस सेक्टर में पूंजीगत निवेश बढ़ा है। वहीं, 2021-22 में बकाया लोन 37,408 रुपये प्रति इकाई था, जो कि 2022-23 में बढ़कर 50,138 रुपये हो गया है। इससे पता चलता है कि लोगों के लिए लोन की उपलब्धता बढ़ी है। सर्वे के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 54 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र की इकाइयों का स्वामित्व महिला उद्यमियों के पास है, जो दर्शाता है कि महिला केंद्रित योजनाओं का फायदा जमीनी स्तर पर हो रहा है।

इनपुट: आईएएनएस

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