Thursday, January 22, 2026
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लिंक्डइन, सोशल मीडिया और फैमिली बैकग्राउंड… H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार की कड़ी सख्ती

अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए एक नई चिंता सामने आई है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा की जांच प्रक्रिया को इतना सख्त बना दिया है कि अब सिर्फ आपका बायोडाटा ही नहीं, बल्कि आपका लिंक्डइन, सोशल मीडिया प्रोफाइल और फैमिली बैकग्राउंड भी चेक किया जाएगा।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Dec 04, 2025 10:59 am IST, Updated : Dec 04, 2025 10:59 am IST
H-1b वीजा का नियम और सख्त...- India TV Paisa
Photo:FREEPIK H-1b वीजा का नियम और सख्त हुए

अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले लाखों भारतीयों के लिए एक बड़ी चुनौती सामने आ गई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा सख्त बना दिया है। अब सिर्फ आपका बायोडाटा ही नहीं, बल्कि आपका लिंक्डइन अकाउंट, सोशल मीडिया प्रोफाइल, काम का इतिहास और यहां तक कि आपके परिवार की प्रोफाइल भी अमेरिकी अधिकारियों की गहन जांच से गुजरेगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी टेक कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की भर्ती करती हैं और H-1B वीजा विदेशी पेशेवरों के लिए सबसे अहम माध्यम है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 2 दिसंबर को एक केबल जारी कर दुनिया भर में स्थित अपने दूतावासों और कांसुलेट्स को निर्देश दिया है कि वे H-1B वीजा आवेदकों की जांच अब अच्छी तरीके से करें। इस नए आदेश का सबसे अहम हिस्सा यह है कि जिन आवेदकों का संबंध फ्री स्पीच सेंसरशिप से जुड़ा पाया जाता है, उनका वीजा सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।

लिंक्डइन और ऑनलाइन जांच

नई पॉलिसी के तहत कांसुलर अधिकारी अब आवेदकों के लिंक्डइन प्रोफाइल, पिछले रोजगार, नौकरी की जिम्मेदारियों और ऑनलाइन एक्टिविटी को विस्तार से खंगालेंगे। यह देखा जाएगा कि कहीं उन्होंने मिसइन्फॉर्मेशन, डिसइन्फॉर्मेशन, कंटेंट मॉडरेशन, फैक्ट-चेकिंग, कंप्लायंस या ऑनलाइन सेफ्टी जैसे सेक्टर्स में काम तो नहीं किया है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इनमें से कुछ भूमिकाएं कभी-कभी अभिव्यक्ति को दबाने से जुड़ सकती हैं और ऐसे किसी भी व्यक्ति को इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के विशेष प्रावधान के तहत वीजा के लिए अयोग्य माना जा सकता है।

रोजगार इतिहास की पड़ताल

इसके अलावा, यह भी निर्देश दिया गया है कि H-1B आवेदकों की पूरी रोजगार इतिहास को बारीकी से जांचा जाए। यह नीति सिर्फ नए आवेदकों पर ही नहीं, बल्कि उन पर भी लागू होगी, जो अपने वीजा को एक्सटेंड या रिन्यू करवाना चाहते हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, H-1B धारक अक्सर टेक, सोशल मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेस से जुड़े काम करते हैं।

भारतीय आईटी सेक्टर चिंतित

एक्सपर्ट का मानना है कि इस सख्ती से H-1B आवेदनों की जांच प्रक्रिया और लंबी होने की संभावना है। भारतीय IT और टेक सेक्टर के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि अमेरिका में इन उद्योगों की रीढ़ विदेशी कर्मचारी ही हैं।

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