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भारत नहीं कर रहा टैरिफ का दुरुपयोग, ट्रंप कर रहे गलत दावा, GTRI बतायी क्या है हकीकत

 Edited By: Pawan Jayaswal
 Published : Sep 20, 2024 01:28 pm IST,  Updated : Sep 20, 2024 01:28 pm IST

ट्रम्प ने 17 सितंबर को भारत को आयात शुल्क का ‘‘दुरुपयोग करने वाला’’ करार दिया था। यह दावा उनके अक्टूबर 2020 के बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने भारत को ‘‘किंग ऑफ टैरिफ्स’’ करार दिया था।

टैरिफ का दुरुपयोग- India TV Hindi
टैरिफ का दुरुपयोग Image Source : REUTERS

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह दावा अनुचित है कि भारत आयात शुल्क (टैरिफ) का ‘‘दुरुपयोग’’ करता है, क्योंकि अमेरिका सहित कई देश कुछ उत्पादों पर उच्च सीमा शुल्क लगाकर अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा करते हैं। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। जीटीआरआई ने रिपोर्ट में कहा, डब्ल्यूटीओ के ‘वर्ल्ड टैरिफ प्रोफाइल’ 2023 के अनुसार, अमेरिका डेयरी उत्पादों (188 प्रतिशत), फलों व सब्जियों (132 प्रतिशत), कॉफी, चाय, कोको तथा मसालों (53 प्रतिशत), अनाज व खाद्य पदार्थ (193 प्रतिशत), तिलहन, वसा व तेल (164 प्रतिशत), पेय पदार्थ व तंबाकू (150 प्रतिशत), मछली व मछली उत्पाद (35 प्रतिशत), खनिज व धातु (187 प्रतिशत) और रसायन (56 प्रतिशत) जैसी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाता है।

ट्रंप का दावा भ्रामक

रिपोर्ट में कहा गया, ये आंकड़े दर्शाते हैं कि अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था के विशिष्ट उत्पादों को उच्च शुल्क के साथ संरक्षित करता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने तर्क दिया कि भारत ‘वाइन’ (मादक पेय पदार्थ) तथा मोटर वाहन सहित कुछ वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाता है। ये आंकड़े समग्र शुल्क परिदृश्य को नहीं दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ट्रम्प का तर्क उच्च शुल्क वाले उत्पादों को अलग करता है, जबकि औसत तथा व्यापार शुल्क की उपेक्षा करता है जो भारत की व्यापार नीति का बेहतर प्रतिनिधित्व करते हैं।’’

ट्रंप ने कहा था ‘‘शुल्क का राजा’’

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने 17 सितंबर को भारत को आयात शुल्क का ‘‘दुरुपयोग करने वाला’’ करार दिया था। यह दावा उनके अक्टूबर 2020 के बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने भारत को ‘‘शुल्क का राजा’’ करार दिया था। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘हालांकि यह सच है कि भारत चुनिंदा उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाता है, लेकिन ट्रम्प का तर्क आवश्यक संदर्भ को नजरअंदाज करता है। इससे उनके आरोप अनुचित हैं।’’ उन्होंने कहा कि कई देश कुछ वस्तुओं पर महत्वपूर्ण शुल्क लगाकर घरेलू उद्योगों की रक्षा करते हैं।

हमने किया कई देशों के साथ FTA

भारत की औसत शुल्क दर 17 प्रतिशत है जो अमेरिका की 3.3 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि, दक्षिण कोरिया की शुल्क दर 13.4 प्रतिशत और चीन की शुल्क दर 7.5 प्रतिशत जैसी अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समान है। इसमें कहा गया, भारत ने आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ), जापान तथा दक्षिण कोरिया जैसे एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) साझेदारों से आयात पर सीमा शुल्क हटाकर मुक्त व्यापार के प्रति अपने खुलेपन का प्रदर्शन किया है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि ट्रम्प औसत शुल्क के बारे में बात नहीं करते हैं, बल्कि भारत द्वारा लगाए गए सबसे अधिक शुल्क वाले उत्पादों को अलग करते हैं।

कुछ उत्पादों पर है ज्यादा शुल्क

जीटीआरआई ने कहा, ‘‘ मिसाल के तौर पर 24 जनवरी 2019 को उन्होंने कहा था कि भारत अमेरिकी व्हिस्की पर 150 प्रतिशत का उच्च आयात शुल्क लगाता है। निश्चित रूप से भारत कई वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाता है। व्हिस्की और वाइन पर 150 प्रतिशत और मोटर वाहन पर 100-125 प्रतिशत का शुल्क है। हालांकि ऐसा करने वाला भारत अकेला देश नहीं है।’’ रिपोर्ट में कहा गया, वास्तव में अधिकतर देशों में कुछ वस्तुओं पर उच्च शुल्क हैं, जैसे जापान में इन वस्तुओं पर 457 प्रतिशत, कोरिया में 887 प्रतिशत और अमेरिका में 350 प्रतिशत शुल्क है। श्रीवास्तव ने कहा कि अधिकतर देश कुछ वस्तुओं पर किसी न किसी कारण उच्च शुल्क लगाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ जापान अपने चावल किसानों, अमेरिका अपने तंबाकू किसानों और भारत अपने बढ़ते शराब उद्योग की रक्षा करना चाहेगा। फिर भी उच्च शुल्क वाली वस्तुएं वह शुल्क नहीं दर्शातीं जिस पर अधिकतर वस्तुओं के लिए वास्तविक व्यापार होता है। औसत शुल्क और व्यापार भार शुल्क किसी देश के ‘टैरिफ प्रोफाइल’ को बेहतर ढंग से दर्शाते हैं।’’

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