भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया गया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.064 अरब डॉलर घटकर 696.672 अरब डॉलर पर आ गया है। यह गिरावट 11 जुलाई को खत्म सप्ताह के दौरान दर्ज की गई। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इससे पिछले सप्ताह, भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 3.049 अरब डॉलर घटकर 699.736 अरब डॉलर पर आ गया था। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 के आखिर में 704.885 अरब डॉलर के साथ अब तक के सर्वाधिक स्तर पर पहुंचा था।
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विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में सबसे बड़ी गिरावट
आरबीआई के अनुसार, 11 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, जो कुल भंडार का प्रमुख हिस्सा होती हैं, 2.477 अरब डॉलर घटकर 588.81 अरब डॉलर रह गईं। डॉलर मूल्य में व्यक्त इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड, येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की मूल्य में उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है। सोने का भंडार इस सप्ताह 498 मिलियन डॉलर घटकर 84.348 अरब डॉलर हो गया।
स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में 66 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 18.802 अरब डॉलर रह गए। शीर्ष बैंक के आंकड़ों के अनुसार, आईएमएफ में भारत की आरक्षित स्थिति 24 मिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 4.711 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गई।
क्या है विदेशी मुद्रा भंडार
विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश के केंद्रीय बैंक (भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा रखी गई विदेशी मुद्राओं, सोने और अन्य आरक्षित संपत्तियों का कलेक्शन होता है। इन भंडारों का उपयोग मुख्य रूप से देश के भुगतान संतुलन को संतुलित करने, अपनी मुद्रा की विनिमय दर को प्रभावित करने और वित्तीय बाजारों में विश्वास बनाए रखने के लिए किया जाता है। केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल अपनी मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर करने के लिए कर सकता है। जैसे अगर रुपये का मूल्य गिर रहा है, तो RBI डॉलर बेचकर और रुपये खरीदकर रुपये को मजबूत कर सकता है।