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मेडिक्लेम पॉलिसी की रकम मेडिकल खर्च के मिले मुआवजे से नहीं काटी जा सकती, हाईकोर्ट का आदेश

 Published : Mar 31, 2025 02:07 pm IST,  Updated : Mar 31, 2025 02:07 pm IST

हाईकोर्ट की पीठ ने फैसला सुनाया कि हमारे विचार में, मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत दावेदार द्वारा हासिल किसी भी राशि की कटौती स्वीकार्य नहीं होगी।

कोर्ट न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।- India TV Hindi
कोर्ट न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। Image Source : FILE

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत किसी व्यक्ति हासिल की गई रकम को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत मेडिकल खर्च के लिए दावेदार की देय मुआवजे की राशि से नहीं काटा जा सकता है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर, मिलिंद जाधव और गौरी गोडसे की पूर्ण पीठ ने 28 मार्च को अपने फैसले में कहा कि मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत हासिल राशि दावेदार द्वारा बीमा कंपनी के साथ किए गए करार को देखते हुए हासिल की जाती है।

पूर्ण पीठ को भेजा गया था मामला

खबर के मुताबिक, पीठ ने फैसला सुनाया कि हमारे विचार में, मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत दावेदार द्वारा हासिल किसी भी राशि की कटौती स्वीकार्य नहीं होगी। इस मुद्दे को विभिन्न एकल और खंडपीठों द्वारा अलग-अलग विचार दिए जाने के बाद पूर्ण पीठ को भेजा गया था। पूर्ण पीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण को न केवल उचित मुआवजा देने का अधिकार है, बल्कि यह उसका कर्तव्य भी है। इसने कहा कि बीमा के चलते हासिल राशि बीमाधारक द्वारा कंपनी के साथ किए गए अनुबंधात्मक दायित्वों के कारण है।

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का था मामला

प्रीमियम का भुगतान करने के बाद, यह स्पष्ट था कि लाभार्थी राशि या तो पॉलिसी की परिपक्वता पर या मृत्यु पर, चाहे मृत्यु का तरीका कुछ भी हो, दावेदार के हिस्से में आएगी। कोर्ट ने कहा कि अपराधी मृतक द्वारा किए गए दूरदर्शिता और बुद्धिमानी भरे वित्तीय निवेश का लाभ नहीं उठा सकता। यह कानून की स्थापित स्थिति है। पूर्ण पीठ मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के एक निर्णय के खिलाफ न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चिकित्सा व्यय के अलावा मौद्रिक मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।

बीमा कंपनी का था ये दावा

बीमा कंपनी ने दावा किया कि चिकित्सा व्यय भी मेडिक्लेम पॉलिसी के हिस्से के रूप में प्राप्त बीमा राशि के अंतर्गत आते हैं। कंपनी ने कहा कि यह दोगुना मुआवजा होगा। अदालत की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त अधिवक्ता गौतम अंखड ने तर्क दिया कि चिकित्सा व्यय से संबंधित मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधान को दावेदार/पीड़ित के पक्ष में व्याख्यायित करने की जरूरत है क्योंकि यह एक कल्याणकारी कानून है। उन्होंने आगे कहा कि बीमाकर्ता को कोई नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि उसे बीमाधारक से प्रीमियम हासिल हुआ है।

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