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MSMEs ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बजट में की ये डिमांड, बताया- उत्पादन में होगी बढ़ोतरी

 Published : Nov 12, 2025 06:56 pm IST,  Updated : Nov 12, 2025 07:00 pm IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी वर्ष अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट ऐसे समय में तैयार किया जा रहा है जब वैश्विक परिदृश्य भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है और अमेरिका द्वारा भारत से आयातित उत्पादों पर भारी टैरिफ लागू है।

एमएसएमई क्षेत्र को भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है।- India TV Hindi
एमएसएमई क्षेत्र को भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। Image Source : FREEPIK

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र ने बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में तकनीकी उन्नयन के लिए विशेष फंड स्थापित करने की मांग की। एमएसएमई प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने और प्रतिस्पर्धात्मकता सुधारने के लिए सरकार से टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड में वृद्धि की आवश्यकता है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, बैठक के दौरान विभिन्न उद्योग संघों ने सस्ती और सुगम ऋण सुविधा के साथ-साथ निर्यात बाजारों तक पहुंच आसान बनाने की भी मांग की। सूत्रों के अनुसार, बैठक का उद्देश्य आगामी संघीय बजट 2026-27 के लिए सुझाव और इनपुट एकत्र करना था, जिसे 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा।

बैठक में लघु उद्योग भारती, काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स, तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, इंडिया एसएमई फोरम, ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, और कन्फेडरेशन ऑफ वुमन एंटरप्रेन्योर्स जैसी प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

एमएसएमई क्षेत्र का योगदान

एमएसएमई क्षेत्र को भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। यह कृषि क्षेत्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। वर्तमान में यह क्षेत्र 12 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है और भारत के GDP में 30% योगदान, मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में 45% योगदान, तथा कुल निर्यात में 40% योगदान देता है।

बैठक में प्रमुख अधिकारी उपस्थित

बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव, और वित्त मंत्रालय एवं एमएसएमई मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह बैठक वित्त मंत्रालय द्वारा आयोजित प्री-बजट कंसल्टेशंस की शृंखला का तीसरा चरण था। इससे पहले, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अर्थशास्त्रियों और कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुकी हैं।

आर्थिक चुनौतियों की पृष्ठभूमि में बजट की तैयारी

निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे समय में तैयार हो रहा है जब भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और अमेरिका द्वारा भारत से आयातित उत्पादों पर 50% तक का शुल्क जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। अगले वित्त वर्ष का बजट मांग बढ़ाने, रोजगार सृजन और 8% से अधिक की स्थायी आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने पर केंद्रित होने की उम्मीद है। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.3% से 6.8% के बीच रहने का अनुमान जताया है।

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