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मुंबई-पुणे हाइवे के 10 साल पुराने इस अधूरे काम पर गडकरी का शानदार जवाब, बताया कब होगा पूरा

 Published : Dec 05, 2025 07:11 pm IST,  Updated : Dec 05, 2025 07:13 pm IST

नितिन गडकरी ने किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी या बचाव का रास्ता न अपनाते हुए, बेहद सरल, स्पष्ट और सम्मानजनक लहजे में जवाब दिया। साथ ही सांसद को काम पूरा होने को लेकर भरोसा भी दिया।

संसद में जवाब देते केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी।- India TV Hindi
संसद में जवाब देते केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी। Image Source : SANSAD TV

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद के शीतकालीन सत्र में पूछे गए एक सवाल का जवाब जिस शालीनता और स्पष्टवादिता से दिया, वह चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, मुंबई-पुणे हाइवे पर पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से लटके एक महत्वपूर्ण काम को लेकर एक सांसद ने सदन में प्रश्न उठाया। सांसद ने अपने सवाल में केवल परियोजना की स्थिति जानने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इस अधूरी परियोजना के कारण आम जनता को हो रही रोजमर्रा की पीड़ा और असुविधा को भी प्रमुखता से केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा।

बेहद सरल, स्पष्ट और सम्मानजनक लहजे में जवाब

सांसद के इस सवाल की भाषा जनभावना को दर्शाती थी। इसके जवाब में, नितिन गडकरी ने किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी या बचाव का रास्ता न अपनाते हुए, बेहद सरल, स्पष्ट और सम्मानजनक लहजे में जवाब दिया। उन्होंने न केवल सांसद की चिंता को स्वीकार किया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि उनका उत्तर तथ्यों पर आधारित हो और आगे की कार्ययोजना को दर्शाता हो।

नितिन गडकरी का जवाब

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सर, यह सम्मानीय सदस्य जो कर रहे हैं, यह सही है। यह रास्ता 2009 में शुरू हुआ और मैं मंत्री 2014 में बना हूं। दरअसल, ये पुराने स्टेट पीडब्ल्यूडी के उस समय के सरकार को दिया गया था। उन्होंने शुरू किया। यह जमीन अधिग्रहण की समस्या थी। अभी तक बहुत कॉन्ट्रैक्टर बदल गए। क्या कारण है मालूम नहीं। काफी कार्रवाई भी की गई। पर अब लगभग 89 प्रतिशत काम पूरा हुआ है और इस साल (2026) अप्रैल के अंदर यह कम्प्लीड रोड पूरा होगा और इसमें कोई तकलीफ नहीं होगी। इसमें बहुत देरी हुई, ये मैं स्वीकार करता हूं।

नितिन गडकरी के इस सहज और सम्मानपूर्ण अंदाज ने सदन में सभी का ध्यान खींचा, क्योंकि यह दर्शाता है कि एक लोक-प्रतिनिधि द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दे को केंद्रीय नेतृत्व कितनी गंभीरता और संवेदनशीलता से लेता है। यह घटना सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।

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