1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. देशभर में 80000 करोड़ रुपये का नहीं कोई दावेदार! बैंकों, बीमा और म्यूचुअल फंड्स में पड़ी है ये रकम

देशभर में 80000 करोड़ रुपये का नहीं कोई दावेदार! बैंकों, बीमा और म्यूचुअल फंड्स में पड़ी है ये रकम

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Nov 12, 2025 12:57 pm IST,  Updated : Nov 12, 2025 12:57 pm IST

देश में हजारों परिवारों की मेहनत की कमाई यूं ही लावारिश पड़ी है, जिसका कोई दावेदार नहीं है। ये रकम बैंकों, बीमा कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स में जमा है, लेकिन उसके असली हकदारों को इस बारे में जानकारी ही नहीं।

देश में 80,000 करोड़ रुपये...- India TV Hindi
देश में 80,000 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। Image Source : CANVA

देश में करोड़ों रुपये ऐसे पड़े हैं, जिनका कोई मालिक ही नहीं है। ये वो रकम है जो कभी किसी की मेहनत की कमाई थी, लेकिन आज लावारिस पड़ी है। बैंकों से लेकर बीमा कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स तक कई जगहों में हजारों खातों में जमा यह पैसा अपने असली हकदारों का इंतजार कर रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि देशभर में करीब 80,000 करोड़ रुपये ऐसे पड़े हैं, जिन पर आज किसी का दावा नहीं है।

सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और सहज मनी के फाउंडर अभिषेक कुमार ने सोशल मीडिया पर यह हैरान करने वाला आंकड़ा शेयर किया है। उन्होंने बताया कि यह पैसा उन लोगों का है, जिनके परिवारों को इस बात की जानकारी ही नहीं कि उनके किसी सदस्य के नाम पर बैंक खाते, बीमा पॉलिसी या म्यूचुअल फंड्स में रकम जमा है।

आखिर क्यों लावारिस रह जाता है पैसा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह समस्या पैसे की कमी नहीं, बल्कि जानकारी और कम्युनिकेशन की कमी का नतीजा है। कई बार परिवार के सदस्यों को पता ही नहीं होता कि किसी ने कहां निवेश किया था। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद, परिवार को उसके बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट या म्यूचुअल फंड निवेश की जानकारी न होने से यह रकम सालों तक बिना दावे के पड़ी रहती है।

कागजी जटिलता और जागरूकता की कमी

अभिषेक कुमार ने बताया कि कई बार लोगों की लापरवाही की वजह से उनका पैसा फंस जाता है। जैसे जरूरी कागजी काम पूरा न करना या बैंक खाते और निवेश में नॉमिनी का नाम न जोड़ना। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक महिला को तब जाकर पता चला कि उनके पति के म्यूचुअल फंड में 15 लाख रुपये जमा हैं, जब हमने उनका पूरा निवेश रिकॉर्ड तैयार करने में मदद की। वहीं, एक दूसरे परिवार को अपने बैंक खाते से पैसा निकालने में दो साल लग गए, सिर्फ इसलिए क्योंकि खाते में नॉमिनी का नाम नहीं था।

सिर्फ वसीयतनामा काफी नहीं

अभिषेक ने कहा कि सिर्फ वसीयतनामा बना लेना पर्याप्त नहीं है। वसीयत तभी मान्य होती है जब वह कानूनी प्रक्रिया के तहत तैयार की जाए। उन्होंने सलाह दी कि वसीयत के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट, साइन की वीडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेज का रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं, ताकि परिवार को बाद में दिक्कत न हो।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा