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Rupee-Dollar Update: रुपया 15 पैसे लुढ़ककर रिकॉर्ड लो 79.97 प्रति डॉलर पर बंद, जानें आगे क्या

Rupee-Dollar Update: रुपया टूटने से देश का चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़ने की आशंका और विदेशी कोषों की निकासी की वजह से अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 80 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक निचले स्तर के पास आ गया है।

Edited By: Alok Kumar @alocksone
Published : Jul 18, 2022 05:50 pm IST, Updated : Jul 18, 2022 06:19 pm IST
Rupee-Dollar Update- India TV Paisa
Photo:FILE Rupee-Dollar Update

Rupee-Dollar Update: अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 80 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में सोमवार को रुपया 15 पैसे की गिरावट के साथ रिकॉर्ड लो 79.97 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। लोकसभा में वित्त मंत्रालय ने आज जानकारी दी कि 2014 से 2022 के बीच रु डॉलर के मुकाबले 25% से ज्यादा कमजोर हुआ है। शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का निवेश वापस लेना रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह है।  कारोबार के दौरान यह थोड़े समय के लिए 80 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक निचले स्तर तक चला गया था। बाजार सूत्रों ने कहा कि रुपये में गिरावट आने का कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और विदेशी पूंजी की बाजार से निर्बाध निकासी जारी रहना था।

चालू खाते का घाटा बढ़ने की आशंका 

रुपया टूटने से देश का चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़ने की आशंका और विदेशी कोषों की निकासी की वजह से अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 80 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक निचले स्तर के पास आ गया है। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ दिन के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में सुधार स्थानीय मुद्रा के लिए कुछ राहत की बात रही है। वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा था कि आयात महंगा होने तथा वस्तुओं का निर्यात कमजोर रहने से चालू खाते के घाटे की स्थिति खराब हो सकी है। 

कहां तक टूट सकता है रुपया?

बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार, भारतीय रुपया साल के अंत तक 81 प्रति डॉलर तक टूट सकता है। इस साल अब तक भारतीय रुपया 9% से अधिक लुढ़क चुकी है। डॉलर में मजबूती और कच्चे तेल कीमतों में तेजी ने रुपया को कमजोर करने का काम किया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल आयात करता है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ा है। 

रुपये में कमजोरी का क्या होगा असर

भारत तेल से लेकर जरूरी इलेक्ट्रिक सामान और मशीनरी के साथ मोबाइल-लैपटॉप समेत अन्य गैजेट्स आयात करता है। रुपया कमजोर होने के कारण इन वस्तुओं का आयात पर अधिक रकम चुकाना पड़ रहा है। इसके चलते भारतीय बाजार में इन वस्तुओं की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसका भुगतान भी डॉलर में होता है और डॉलर के महंगा होने से रुपया ज्यादा खर्च होगा। इससे माल ढुलाई महंगी होगी, इसके असर से हर जरूरत की चीज पर महंगाई की और मार पड़ेगी।

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