अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को अपना सबसे बड़ा कूटनीतिक हथियार बनाते हुए ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हो रही हिंसक कार्रवाई को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने ऐसा कदम उठाया है, जिसका असर सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि इसकी आंच अमेरिकी जनता की जेब तक पहुंच सकती है। कपड़े, ज्वैलरी और कई रोजमर्रा की चीजें आने वाले समय में अमेरिका में महंगी हो सकती हैं।
ईरान पर दबाव बनाने की नई रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अमेरिका 25 फीसदी तक का टैरिफ लगाएगा। इस कदम का मकसद ईरानी सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर करना है, ताकि वह देशभर में चल रहे प्रदर्शनों पर हो रही कथित हिंसा को रोके। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, ईरान में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर
पहले से ही प्रतिबंधों से जूझ रहा ईरान इस फैसले से और अलग-थलग पड़ सकता है। देश में महंगाई दर 40 फीसदी से ऊपर है और विदेशी सामानों की कीमतें और बढ़ने की आशंका है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरानी सरकार सिर्फ आर्थिक दबाव के कारण अपने रुख में बदलाव करेगी, इसकी संभावना कम है।
अमेरिका में क्यों बढ़ेगी महंगाई?
ट्रंप के इस फैसले का उल्टा असर अमेरिका पर भी पड़ सकता है। ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों में तुर्की, भारत, चीन और यूएई शामिल हैं। ऐसे में तुर्की से आने वाले टेक्सटाइल, भारत से आने वाले कीमती रत्न और ज्वैलरी, और चीन से जुड़े कई प्रोडक्ट्स पर टैरिफ बढ़ सकता है। इसका सीधा बोझ अमेरिकी ग्राहकों पर पड़ेगा।
चीन के साथ ट्रेड ट्रूस पर खतरा
सबसे बड़ा झटका अमेरिका-चीन व्यापार समझौते को लग सकता है। चीन, ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऐसे में नए टैरिफ से दोनों देशों के बीच पिछले साल बनी नाजुक ट्रेड शांति टूट सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की धमकियां अमेरिका और चीन के बीच भरोसे को और कमजोर करेंगी।
कानूनी पेच भी बरकरार
ट्रंप प्रशासन ने अभी यह साफ नहीं किया है कि ये नए टैरिफ पहले से लागू शुल्कों के ऊपर लगेंगे या नहीं। साथ ही, इन टैरिफ्स की वैधानिकता को लेकर मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अगर कोर्ट ने टैरिफ को रद्द किया, तो सरकार को कंपनियों को भारी रिफंड देना पड़ सकता है।






































