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Shankh Air: कभी सड़कों पर टेंपो दौड़ाते थे ये शख्स, अब आसमान में गूंजेगा उनका 'शंख'; कानपुर का बेटा बदलेगा भारत के एविएशन सेक्टर की तस्वीर!

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Dec 26, 2025 11:59 am IST,  Updated : Dec 26, 2025 11:59 am IST

भारतीय एविएशन सेक्टर में एक बार फिर बदलाव की बयार बह रही है। जहां एक ओर नई एयरलाइंस नए रूट्स और आधुनिक विमानों के साथ उड़ान भरने को तैयार हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ कहानियां ऐसी भी हैं, जो सिर्फ बिजनेस नहीं बल्कि हौसले, संघर्ष और सपनों की उड़ान का प्रतीक बन जाती हैं।

Shankh Air के फाउंडर श्रवण...- India TV Hindi
Shankh Air के फाउंडर श्रवण कुमार विश्वकर्मा Image Source : OFFICIAL WEBSITE

Founder of Shankh Air: भारत के एविएशन सेक्टर में एक बार फिर नई उड़ान की तैयारी है। जहां एक ओर हवाई सफर आम लोगों की जरूरत बनता जा रहा है, वहीं अब ऐसे चेहरे भी सामने आ रहे हैं जो इस बदलाव को जमीन से आसमान तक जी चुके हैं। कानपुर की तंग गलियों से निकलकर देश के एयरस्पेस तक पहुंचने की कहानी श्रवण कुमार विश्वकर्मा की है, जो आज Shankh Air के जरिए भारत के एविएशन मैप पर अपनी अलग पहचान बनाने जा रहे हैं।

श्रवण कुमार विश्वकर्मा उत्तर प्रदेश के कानपुर से ताल्लुक रखते हैं। मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे श्रवण की जिंदगी आसान नहीं रही। पढ़ाई में मन कम लगता था और हालात ऐसे बने कि उन्हें कम उम्र में ही काम की दुनिया में उतरना पड़ा। जरूरत के वक्त उन्होंने न सिर्फ टेंपो में सफर किया, बल्कि खुद टेंपो चलाकर रोजी-रोटी भी कमाई। यही अनुभव उन्हें आम आदमी की परेशानियों के सबसे करीब ले आया।

शुरुआती कारोबार

समय के साथ श्रवण ने खुद को संभाला और कारोबार की राह पकड़ी। सरिया (TMT) के बिजनेस से शुरुआत कर उन्होंने सीमेंट, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कदम रखा। देखते ही देखते ट्रकों का बड़ा बेड़ा खड़ा किया और एक सफल कारोबारी के तौर पर पहचान बनाई। लेकिन उनके मन में कुछ बड़ा करने की चाह हमेशा बनी रही।

शंख एयर का ख्याल कब आया?

करीब 3-4 साल पहले उन्हें महसूस हुआ कि हवाई यात्रा अब सिर्फ लग्जरी नहीं रही, बल्कि समय की जरूरत बन चुकी है। इसके बावजूद मिडिल क्लास के लिए भरोसेमंद और किफायती एयरलाइन ऑप्शन सीमित हैं। यहीं से शंख एयर का विचार जन्मा। करीब 26 महीने पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश की पहली एयरलाइन शुरू करने का सपना देखा और उसे साकार करने में जुट गए।

शंख एयर का नाम कैसे पड़ा?

एयरलाइन के नाम के पीछे भी एक गहरी सोच है। श्रवण के मुताबिक, ‘शंख’ भारतीय संस्कृति में आस्था और पहचान का प्रतीक है। हर घर में शंख होता है, लेकिन उसे सही तरीके से बजाना सबके बस की बात नहीं। यही सोच उनकी ब्रांड फिलॉसफी परंपरा के साथ कुछ अलग और प्रभावशाली को दर्शाती है।

शंख एयर का किराया मॉडल

शंख एयर की सबसे बड़ी खासियत इसका किराया मॉडल होगा। श्रवण का दावा है कि यहां डायनामिक प्राइसिंग नहीं होगी। यानी सुबह जो टिकट का दाम होगा, वही शाम को भी रहेगा। उनका सपना है कि हवाई चप्पल पहनने वाला आम आदमी भी बिना डर के हवाई जहाज में सफर कर सके।

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