पश्चिम एशिया में जारी तनाव, तेल-गैस की कीमतों में तेजी और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के बीच जानकारों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रख सकता है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक बुधवार, 3 मई को शुरू होगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 5 मई को बैठक में हुए फैसलों की घोषणा करेंगे। एक्सपर्ट्स ने कहा कि रेपो रेट को स्थिर रखने के साथ ही आरबीआई अपने सतर्क रुख पर भी कायम रहेगा।
GDP की वृद्धि दर के अनुमान में कटौती कर सकता है RBI
हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेल-गैस की बढ़ती कीमतों, रुपये में गिरावट और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण आरबीआई अपने महंगाई के अनुमान को बढ़ा सकता है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर के अनुमान में कटौती कर सकता है। अप्रैल में आरबीआई ने पश्चिम एशिया संघर्ष के ऊर्जा आपूर्ति, महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर प्रभाव का आकलन करने के लिए 'देखो और इंतजार करो' का रुख अपनाते हुए रेपो रेट को स्थिर रखा था।
अगले तीन तिमाहियों में 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है महंगाई दर
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के आर्थिक शोध विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा अस्थिर परिस्थितियों को देखते हुए जून की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को स्थिर रखे जाने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर अगले तीन तिमाहियों में 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, जबकि चालू तिमाही में इसके 4 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.2 प्रतिशत और पूरे वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
रेपो रेट को लेकर क्या है क्रिसिल का अनुमान
आरबीआई ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि वो चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि और मुद्रास्फीति पूर्वानुमान प्रणाली की समीक्षा और उसमें सुधार करेगा। क्रिसिल की मुख्य अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि आरबीआई के रेपो रेट को स्थिर रखने और तटस्थ नीति रुख बनाए रखने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में महंगाई का दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा है, जिसमें ऊंची ईंधन लागत, कच्चे माल की बढ़ी कीमतें और कमजोर रुपया शामिल हैं।