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बच्चों के आधार बायोमेट्रिक अपडेट के लिए अब नहीं भागना पड़ेगा सेंटर, स्कूल के साथ मिलकर UIDAI उठाने जा रहा ये कदम

 Published : Jul 21, 2025 08:23 am IST,  Updated : Jul 21, 2025 10:53 am IST

यूआई़डीएआई अब एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिसके जरिए माता-पिता की सहमति के साथ बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट स्कूल परिसर में ही किया जाएगा। तय समय में अगर यह अपडेट नहीं किया गया, तो आधार नंबर निष्क्रिय भी किया जा सकता है।

यह काम अगले 45 से 60 दिनों में चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा।- India TV Hindi
यह काम अगले 45 से 60 दिनों में चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा। Image Source : FREEPIK/CANVA

पांच वर्ष की आयु पूरी करने के बाद देश के 7 करोड़ से अधिक बच्चों ने अब तक आधार में जरूरी बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराया है। ऐसे बच्चों के लिए आधार जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI अब देशभर के स्कूलों के माध्यम से बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, यह काम अगले 45 से 60 दिनों में चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा। यह जानकारी UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार ने बीते रविवार को दी। 

आधार अपडेट का केंद्र बनेंगे स्कूल

खबर के मुताबिक, यूआई़डीएआई अब एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिसके जरिए माता-पिता की सहमति के साथ बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट स्कूल परिसर में ही किया जाएगा। प्राधिकरण इस तकनीक की फिलहाल टेस्टिंग कर रहा है और यह आगामी दो महीनों में तैयार हो सकती है। नियमों के मुताबिक, 5 से 7 वर्ष की उम्र के बीच बायोमेट्रिक अपडेट नि:शुल्क होता है, लेकिन 7 वर्ष के बाद इसके लिए ₹100 शुल्क देना होता है। तय समय में अगर यह अपडेट नहीं किया गया, तो आधार नंबर निष्क्रिय भी किया जा सकता है।

स्कूल प्रवेश और अन्य लाभ के लिए जरूरी

बायोमेट्रिक अपडेट के बाद आधार कार्ड का इस्तेमाल स्कूल में दाखिला, स्कॉलरशिप, सरकारी योजनाओं और परीक्षा पंजीकरण जैसी सेवाओं में सहजता से किया जा सकेगा। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यह सुविधा 15 वर्ष की आयु पर होने वाले दूसरे अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट यानी MBU के लिए भी स्कूल और कॉलेजों के माध्यम से प्रदान करने की योजना बना रहा है।

प्राधिकरण इस प्रोजेक्ट के तहत हर जिले में बायोमेट्रिक मशीनें भेजेगा, जो विभिन्न स्कूलों में रोटेशन के आधार पर भेजी जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इस सुविधा का लाभ मिल सके। प्राधिकरण का मकसद है कि सभी बच्चों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ समय पर मिले और उनकी पहचान से जुड़ी प्रक्रिया आसान और सुलभ हो।

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