अमेरिका ने भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर अपनी फैक्टशीट में बदलाव किया है, जिसमें दालों का जिक्र हटा दिया गया है।
विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के टॉप अधिकारियों ने कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को ये जानकारी दी।
ट्रंप ने अपने आदेश में आगे कहा कि भारत ने ये स्पष्ट किया है कि वो अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और हाल में अगले 10 सालों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी जैसी रिफाइनरियों ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाने के तुरंत बाद रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था।
वाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका, भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को भी हटा देगा।
मौजूदा समय में रूस का कच्चा तेल अब लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है। जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूस से तेल आयात दिसंबर के मुकाबले थोड़ा कम हुआ है।
तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 के तहत लगाए जाने वाले ओआईडी उपकर को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद 1 मार्च, 2016 से विशिष्ट दर के बजाय 20 प्रतिशत मूल्य-आधारित शुल्क में बदल दिया गया था।
अब तुर्की, भारत को पीछे छोड़ते हुए रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया है, जिसने दिसंबर में रूस से 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे।
जामनगर के कॉम्प्लेक्स में दो रिफाइनरियां हैं। एक SEZ यूनिट है जहां से यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य बाजारों में फ्यूल एक्सपोर्ट किया जाता है और एक पुरानी यूनिट जो मुख्य रूप से घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करती है।
डोनाल्ड ट्रंप अब वेनेजुएला के तेल को अपने कंट्रोल में लेकर बड़ी मात्रा में तेल उत्पादन शुरू करने की योजना पर तेजी से काम कर रहे हैं।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि जैसे-जैसे टैरिफ का खतरा गहरा रहा है, भारत को रूसी तेल के मुद्दे पर एक स्पष्ट फैसला लेना होगा।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात 81.3 प्रतिशत घटकर 2.55 अरब डॉलर रह गया, जबकि कुल व्यापार भी मामूली स्तर पर ही रहा।
भारत की प्रमुख विदेश तेल अन्वेषण एवं उत्पादन कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) पूर्वी वेनेजुएला के 'सैन क्रिस्टोबल' तेल क्षेत्र का संयुक्त संचालन करती है।
दुनिया के सबसे धनी लोगों की लिस्ट में रूस के वागिट अलेक्पेरोव अभी 62वें स्थान पर हैं।
21 नवंबर के बाद रूसी तेल का आयात घटकर लगभग 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो मासिक आधार पर 5.7 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी दर्शाता है।
रूसी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसी कंपनियों ने फिलहाल रूसी तेल का आयात रोक दिया है।
अमेरिका के दबाव और रूस पर लगे कड़े प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस की ऊर्जा साझेदारी पहले से ज्यादा मजबूत होती दिख रही है। रूस के भारत में राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि रूस ने भारत के लिए एक भरोसेमंद एनर्जी पार्टनर के रूप में खुद को साबित किया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर विदेश मंत्रालय ने साफ संदेश दिया है और अपनी स्थिति फिर से स्पष्ट कर दी है। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी दुनिया के सामने अपनी बात रख चुके हैं।
एशियाई बाजार में रूसी तेल एक बार फिर भारी छूट पर बिक रहा है। भारत और चीन ने हाल ही में रूसी कच्चे तेल की खरीद घटा दी है, जिसके चलते रूस के लिए यह स्थिति गंभीर आर्थिक दबाव का कारण बन गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को ल्यूकऑयल के साथ रूस की एक अन्य तेल कंपनी रॉसनेफ्ट पर भी नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। ये दोनों कंपनियां रूस के कुल तेल निर्यात का करीब आधा हिस्सा संभालती हैं।
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