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बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही बर्बरता पर बोले अशोक गहलोत, बताया मानवता पर कलंक

 Published : Jan 06, 2026 01:42 pm IST,  Updated : Jan 06, 2026 01:47 pm IST

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ बर्बरता की खबरें विचलित करने वालीं। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को हस्तक्षेप कर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत- India TV Hindi
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत Image Source : PTI (FILE)

बांग्लादेश में बीते काफी दिनों से हिंदुओं पर अत्याचार और उनका कत्लेआम किया जा रहा है। इसपर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार को मानवता पर कलंक बताया है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेश के भारत के खिलाफ होने को केंद्र सरकार की कूटनीतिक विफलता बताया। इस संबंध में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने ऑफिशियल हैंडल से एक पोस्ट भी साझा किया है। 

वरिष्ठ नेता ने पोस्ट में लिखा, "बांग्लादेश से आ रही हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ बर्बरता की खबरें विचलित करने वाली हैं। महज 19 दिनों में 5 हिंदुओं की हत्या एवं वहां महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार मानवता पर कलंक हैं।"

'यह भारत सरकार की कूटनीतिक विफलता'

उन्होंने एक्स पर किए गए पोस्ट में आगे लिखा, "1971 के उस दौर की यादें आज भी ताजा हैं जब इंदिरा गांधी जी के नेतृत्व में भारत ने न केवल कूटनीतिक कड़ापन दिखाया था, बल्कि अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इतिहास और भूगोल दोनों बदल दिए थे। उन्होंने अमेरिका जैसी महाशक्ति तक की परवाह नहीं की, जिसने भारत के खिलाफ अपना सातवां बेड़ा रवाना कर दिया था। "यह भी चिंताजनक है कि ऐसा देश जिसका निर्माण ही भारत ने किया था वह भारत के खिलाफ हो गया है। यह भारत सरकार की कूटनीतिक विफलता है।" 

'केंद्र सरकार को रस्मी बयानों से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने चाहिए'

पूर्व सीएम ने आगे लिखा, " केंद्र सरकार को 'गहरी चिंता' व्यक्त करने जैसे रस्मी बयानों से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने चाहिए। पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के जीवन और मान-सम्मान की रक्षा करना हमारी नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी है। इतिहास गवाह है कि मात्र खोखले नारों से नहीं, बल्कि निर्णायक नेतृत्व से ही निर्दोषों की जान बचाई जा सकती है। प्रधानमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप कर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर प्रभावी दबाव बनाना चाहिए।"

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