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Holi 2026: इस बार होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का साया, जानें होली जलाने का शुभ मुहूर्त

Holika Dahan 2026 Date and Muhurat: हिंदू धर्म में होलिका दहन का विशेष महत्व है। इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा। तो आइए जानते हैं कि होलिका दहन के दिन भद्रा कब से कब तक रहेगा। साथ ही जानिए होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त।

Written By: Vineeta Mandal
Published : Jan 25, 2026 05:30 pm IST, Updated : Jan 25, 2026 05:30 pm IST
Holi 2026- India TV Hindi
Image Source : UNSPLASH/FILE Holi 2026

Holika Dahan 2026 Shubh Muhurat: इस साल होली का त्यौहार 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। रंगों का यह उत्सव पूरे देश में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। होली को 'फगुआ', 'धुलेंडी', 'धूलिवंदन' और 'दोल'  नाम से भी जाना जाता है। वही होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन के बाद ही होली खेली जाती है। होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा। आपको बता दें कि हिंदू धर्म में भद्रा का शुभ समय नहीं माना गया है। इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किए जाते हैं। तो आइए जानते हैं कि होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। 

होलिका दहन 2026 डेट

हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन किया जाता है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा। 

होलिका दहन 2026 पर भद्रा काल का समय

इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा। होलिका दहन पर भद्रा का 3 मार्च को समय 01:25am से 04:30am तक रहेगा। भद्रा के समय होलिका पूजा और होलिका दहन नहीं किया जाता है। सभी शुभ कार्य भद्रा में वर्जित माने जाते हैं।  इस दौरान किसी पूजा-पाठ करने की भी मनाही होती है। ऐसे में भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जा सकता है।

  • भद्रा पूंछ - 01:25 ए एम से 02:35 ए एम (3 मार्च)
  • भद्रा मुख - 02:35 ए एम से 04:30 ए एम (3 मार्च)

होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त

होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त 3 मार्च को शाम 06 बजाकर 22 मिनट से रात 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी समय होलिका दहन किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, होलिका दहन से सभी नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  बता दें कि होलिका का ये त्यौहार बहुत पुराने समय से मनाया जा रहा है। इसका आरंभिक शब्दरूप 'होलाका' बताया गया है। वहीं कुछ ग्रंथों में होलिका को 'हुताशनी'भी कहा गया है। इसके अलावा भारत देश की संस्कृति में इस दिन को राजा हिरण्यकश्यप और होलिका पर भक्त प्रह्लाद की जीत के रूप में मनाया जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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