हर साल भाद्रपद की कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि पर कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। कजरी तीज पर भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इसी दिन शिवशक्ति का मिलन हुआ था। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती है। इस साल कजरी तीज 12 अगस्त को मनाया जाएगा। ऐसे में विद्वानों की मानें तो इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। आइए जानते हैं कि कब पूजा करना होगा ज्यादा शुभदायी...
कजरी तीज कब तक मनाई जाएगी?
द्रिक पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 11 अगस्त 2025 की सुबह 10.33 बजे आरंभ होगी, जो 12 अगस्त की सुबह 08.40 बजे पर समाप्त होगी। उदया तिथि की मान्यता के कारण कजरी तीज 12 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी।
पूजा मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04.23 बजे से 05.06 बजे तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02.38 बजे से 03.031 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 07.03 बजे से 07.25 बजे तक
- निशिथ काल मुहूर्त- रात 12.05 बजे से 12.48 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11.52 बजे से 13 अगस्त की सुबह 05.49 बजे तक
सर्वाथ सिद्धि योग- सुबह 11.52 बजे से 13 अगस्त की सुबह 05.49 बजे तक
कजरी तीज के दिन पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- फिर मंदिर की सफाई करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछा कर शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- अब मां पार्वती को 16 श्रृंगार अर्पित करें और महादेव को गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र, धतूरा-भांग आदि अर्पित करें।
- इसके बाद कजरी तीज की कथा का पाठ करें या सुनें।
- अंत में भगवान शिव व मां पार्वती की आरती करें और क्षमा याचना भी करें।
- इसके बाद रात में चंद्र देव की पूजा करें और अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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