Maha Shivratri Special: भगवान शिव का स्वरूप सभी देवताओं से बिल्कुल अलग है। जहां अन्य देवताओं के के शरीर पर सोना, हीरा और अन्य कीमती अभूषण रहते हैं। वहीं भगवान शिव के शरीर पर भस्म और गले में सांप लिपटा रहता है। महादेव को प्रसन्न करने के लिए छप्पन भोग या कठिन तप, व्रत करने की जरूरत नहीं पड़ती है। भोलेनाथ एक लोटा जल और कुछ बेलपत्र में ही प्रसन्न हो जाते हैं। आज हम महाशिवरात्रि स्पेशल में जानेंगे कि आखिरी भगवान शिव ने एक नाग को अपने गले का हार क्यों बनाया। इसके साथ ही यह भी जानेंगे कि शिवजी के गले में लिपटे सांप का क्या नाम है।
भगवान शिव के गले में लिपटे सांप का नाम वासुकी है, उन्हें नागों का देवता कहा जाता है। नागराज वासुकी को शेषनाग का भाई माना जाता है। नागों के देवता माने जाने वाले नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे। उन्हें शिवजी के प्रिय भक्त और सेवक के रूप में जाना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, नाग वासुकी को एक तरफ से देवताओं ने जबकि दूसरी ओर से असुरों ने पकड़ा हुआ था। समुद्र मंथन के दौरान कई चीजें निकली थी जिसका वितरण असुरों और देवताओं के बीच किया गया था। वहीं समुद्र मंथन से विष भी निकला था और संसार को बचाने के लिए उस विष को शिवजी ने ग्रहण किया था। समुद्र मंथन के दौरान नागराज वासुकी बुरी तरह घायल हो गए थे, तब शिवजी ने उनकी भक्ति को देखकर उन्हें अपने गले में स्थान दिया।
हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है। इस साल 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा। चतुर्दशी तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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