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इन दो आरती के बिना अधूरी है शरद पूर्णिमा की पूजा, यहां देखें आरती के लिरिक्स

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Oct 06, 2025 01:45 pm IST,  Updated : Oct 06, 2025 01:45 pm IST

Sharad Purnima Aarti: शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। मान्यता है​ कि शरद पूर्णिमा की रात को निकलने वाला चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है। ऐसे में इस रात इन दोनों की विधि-विधान से पूजा और विशेष आरती करनी चाहिए। यहां देखें आरती के लिरिक्स

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शरद पूर्णिमा की आरती Image Source : FREEPIK/CANVA

Sharad Purnima ki Aarti In Hindi: हिंदू धर्म में आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा और कोजागिरी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। वहीं, इस खास तिथि के कारक चंद्र देवता जाते हैं। ऐसे में उनकी पूजा का खास महत्व होता है। इस रात में लक्ष्मी जी और चंद्रमा की पूजा-पाठ का दोगुना फल मिलता है। 

कहा जाता है कि इस दिन चंद्र देवता की विधि-विधान से पूजा करने से वे आशीर्वाद देते हैं और कुंडली का चंद्र दोष दूर होता है। इसके अलावा यह तिथि रास पूर्णिमा भी कहलाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक आप पूजा के अंत में देवी-देवताओं के गुणों का गान करने वाली आरती नहीं गाई जाती। यहां पढ़िए शरद पूर्णिमा पर गाई जाने वाली आरती

Laxmi Ji Ki Aarti: लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता

मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

Chandra Devta Ki Aarti: चंद्र देवता की आरती 

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।
ॐ जय सोम देवा।।

रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
दीन दयाल दयानिधि, भव बंधन हारी।
ॐ जय सोम देवा।।

 
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।
ॐ जय सोम देवा।।

 
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, संत करें सेवा।
ॐ जय सोम देवा।।

वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।
ॐ जय सोम देवा।।

 
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।
ॐ जय सोम देवा।।

 
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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