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Chaitra Navratri 2026 Maa Kalratri Katha: महासप्तमी पूजा के दिन देवी के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की कथा, जानें माता पार्वती ने क्यों लिया था उग्र रूप

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Mar 24, 2026 10:41 pm IST,  Updated : Mar 24, 2026 10:41 pm IST

Navratri 7th Day Story: नवरात्रि का सातवां दिन देवी कालरात्री को समर्पित है। इस दिन मां कालरात्रि की उपासना अत्यंत ही लाभकारी होता है। तो आइए जानते हैं कि नवरात्रि के सातवें दिन की पौराणिक कथा क्या है।

मां कालरात्रि- India TV Hindi
मां कालरात्रि Image Source : FILE IMAGE

Maa Kalratri Vrat Katha: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्री की पूजा की जाती है। इस दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की उपासना करने से भक्तों को हर दुख, भय और परेशानी से शीघ्र छुटकारा मिल जाता है। नवरात्रि की सप्तमी तिथि को महासप्तमी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। कालरात्रि देवी पार्वती का सबसे उग्र और भयंकर रूप है लेकिन वह अपने भक्तों को अभय एवं वरद मुद्रा द्वारा आशीर्वाद प्रदान करती हैं। उग्र रूप में विद्यमान अपनी शुभ अथवा मंगलदायक शक्ति के कारण देवी कालरात्रि को देवी शुभंकरी के नाम से भी जाना जाता है।

नवरात्रि के सातवें दिन की कथा (मां कालरात्रि व्रत कथा)

पौराणिक कथा के अनुसार, माता ने शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज नामक राक्षसों का वध करके देवी-देवताओं और मनुष्यों की रक्षा की थी। कथा है कि एक बार शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज के आतंक से तीनों लोक थर-थर कांपने लगे। चारों ओर इन राक्षसों का भय व्याप्त था। तब समस्त देवी-देवता भगवान शिव के पास इस समस्या का समाधान पाने के लिए गए। महादेव ने माता पार्वती से शुंभ-निशुंभ का अंत करने की बात कही। इसके बाद माता ने दुर्गा रूप धारण कर शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया। हालांकि, जब रक्तबीज का संहार करने माता गई तो एक समस्या सामने आई। रक्तबीज को यह वरदान मिला था कि उसके रक्त की बूंद धरती पर गिरते ही उसके जैसा एक और राक्षस जन्म लेगा। तब माता दुर्गा ने अपने तेज से मां कालरात्रि का रूप धारण किया। माता कालरात्रि ने रक्तबीज के रक्त को धरती पर नहीं गिरने दिया और गिरने से पहले ही उसे अपने मुंह में भर लिया। इस तरह माता कालरात्रि ने अंत में रक्तबीज का भी संहार कर दिया। मां कालरात्रि न केवल दुष्टों का विनाश करती हैं, बल्कि अपने भक्तों के लिए वे शुभ फलदायी हैं।

नवरात्रि के सातवां दिन- शुभ रंग और भोग

नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग पहनना शुभ होता है। वहीं इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ और मालपुआ का भोग लगाएं। इस दिन देवी कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाने से जीवन में सुख-समृद्धि की वर्षा होती है। साथ ही हर तरह के भय और नकारात्मकता से भी छुटकारा मिलता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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