भारत में निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का आज निधन हो गया है। 13 साल से ज्यादा समय तक कोमा में रहने के बाद एम्स-दिल्ली में मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। 31 वर्षीय हरीश राणा को 14 मार्च को गाजियाबाद स्थित उनके घर से AIIMS के डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टिट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट रखा गया था। वह 2013 से कोमा में थे। बता दें कि भारत में ये पैसिव यूथेनेसिया का पहला मामला है।
बुधवार सुबह दिल्ली में होगा अंतिम संस्कार
हरीश राणा का 24 मार्च को शाम चार बजकर 10 मिनट पर दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वह डॉक्टरों की एक विशेष टीम की देखरेख में थे और उन्हें ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा मिश्रा के नेतृत्व वाली पैलिएटिव ऑन्कोलॉजी यूनिट में भर्ती कराया गया था। हरीश का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह 9 बजे दिल्ली के ग्रीन पार्क शवदाह गृह में किया जाएगा। इसकी सूचना परिवार की ओर से अपनी सोसायटी के व्हाट्सऐप ग्रुप पर दी गई है।
सोसायटी में पसरा सन्नाटा
हरीश राणा की मौत की सूचना के बाद से सोसायटी में सन्नाटा पसर गया है। जैसे ही खबर आई पूरी सोसायटी में गम का माहौल हो गया। लोग उनके घर पर सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। हालांकि परिवार अभी यहां मौजूद नहीं है। कुछ रिश्तेदार फ्लैट पर हैं। सोसायटी में हर कोई गमजदा नजर आ रहा है।
कैसे इस हालत में पहुंचे हरीश?
गाजियाबाद के हरीश राणा करीब 13 साल से अचेत अवस्था में पड़े हुए थे। जानकारी के मुताबिक, चंडीगढ़ में रह कर पढ़ाई कर रहे हरीश 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं थी। उसके बाद से वह लगातार बिस्तर में अचेत हालत में थे। लगातार बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर पर घाव बन गए थे।
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