Navratri Mein Ramayan Path Kaise Kare (नवरात्रि में रामायण पाठ करने के नियम): 19 मार्च, गुरुवार के दिन से चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत हो गई है, जिसका समापन 27 मार्च को होगा। नौ दिवसीय इस त्योहार में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। आज नवरात्र के पहला दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इन 9 दिनों के दौरान व्रत रखा जाता है, ऐसे साधक जो उपवास नहीं रखते हैं वो इन दिनों केवल सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस पर्व के दौरान सुबह-शाम मां दुर्गा की आरती और पूजा करने का विधान है। इसके साथ ही नवरात्रि में रामायण पाठ भी बहुत महत्व है। इन दिनों रामायण पढ़ने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। इससे जुड़े सही नियम और विधि आपको जरूर पता होने चाहिए। चो चलिए जानते हैं नवरात्रि के दौरान रामायण पाठ करने के सही नियम और विधि क्या है।
नवरात्रि में रामायण पढ़ने के नियम (Navratri Mein Ramayan Path Ke Niyam)
- नवरात्रि के माता अंबे के साथ भगवान राम की पूजा का भी विधान है।
- नवरात्रि के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके साफ वस्त्र पहनें।
- सबसे पहले रामायण को लाल या पीले रंग के कपड़े में लकड़ी की चौकी पर रखें ।
- अगर आप व्रत रखते हैं तो व्रत का संकल्प लें पाठ शुरू करने से पहले रामायण की पुस्तक को तिलक करके अक्षत करिए।
- नौ दिनों में रामायण का पाठ पूरा करने के लिए दिन के अनुसार विश्राम निर्धारित होते हैं उसी के अनुसार उतने ही पाठ एक दिन में करें ।
- रामायण पाठ के बीच में किसी से बातचीत न करें ना ही इधर उधर ध्यान दें।
नवरात्रि के नौ दिन रामायण का पाठ दिन के अनुसार करिए। जानते हैं किस दिन कौन सा पाठ करें
- पहले दिन: 1 से 116 तक पाठ करिए
- दूसरे दिन: 116 से 218 तक पाठ करिए
- तीसरे दिन: 218 से 322 तक पाठ करिए
- चौथा दिन: 322 से 424 तक पाठ करिए
- पांचवा दिन: 424 से 524 तक पाठ करिए
- छठा दिन: 524 से 644 तक पाठ करिए
- सातवां दिन: 644 से 766 तक पाठ करिए
- आठवां दिन: 766 से 902 तक पाठ करिए
- नौवां दिन: 902 से 1031 तक का पाठ करिए
रामायण पाठ का क्या है महत्व (Ramayan Path Signicance)
इस नियम और सही विधि से रामायण का पाठ करने से नवरात्रि के नौ दिन में आपकी रामायण पूरी हो जाएगी। मान्यता है कि घर में रामायण का पाठ करने से कोई अनहोनी या बड़ी विपत्ति नहीं आती। साथ ही किसी भी प्रकार का शत्रु भय नहीं होता। नवरात्रि के आखिरी दिन रामायण पाठ का समापन होने के बाद रामायण जी की आरती अवश्य करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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