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Shabari Jayanti 2026: रविवार 8 फरवरी को मनाई जाएगी शबरी जयंती, नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Feb 07, 2026 08:34 am IST,  Updated : Feb 07, 2026 12:21 pm IST

Shabri Jayanti 2026: शबरी जयंती 8 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। शबरी जयंती के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब रहेगा और किस विधि से इस दिन आपको पूजा करनी चाहिए, आइए विस्तार से जानते हैं।

Shabri Jayanti 2026- India TV Hindi
शबरी जयंती 2026 Image Source : CANVA

Shabri Jayanti 2026: शबरी जयंती हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में 8 फरवरी को शबरी जयंती मनाई जाएगी। भगवान राम की परम भक्त माता शबरी का बाल्यकाल में नाम श्रमणा था लेकिनवो शबर जाति की थीं इसलिए शबरी के नाम से उन्हें पुकारा जाने लगा। बाल्यकाल से ही शबरी वैराग्य के मार्ग पर चलने लगी थीं। शबरी ने अपना पूरा जीवन भगवान राम के इंतजार में बिताया और अंत समय से पहले उनकी भेंट भगवान राम से हुई थी। भगवान राम की अनन्य भक्त, दया, भक्ति और निष्ठा की जीवंत उदाहरण होने के चलते ही आज भी माता शबरी को याद किया जाता है और शबरी जयंती मनाई जाती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि शबरी जयंती के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब रहेगा और इस दिन किस विधि से आपको पूजा करनी चाहिए। 

शबरी जयंती 2026 पूजा मुहूर्त (Shabri Jayanti)

शबरी जयंती फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में सप्तमी तिथि 8 फरवरी को शुरू हो जाएगी।

  • सप्तमी तिथि प्रारम्भ - फरवरी 08, 2026 को 02:54 AM से
  • सप्तमी तिथि समाप्त - फरवरी 09, 2026 को 05:01 AM तक

पुजा मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त की पूजा के लिए शुभ समय- 05:29 AM से 06:20 AM तक
  • प्रातः सन्ध्या - 05:55 AM से 07:10 AM तक
  • अमृत काल - 09:31 AM से 11:05 AM तक

शबरी जयंती पूजा विधि

शबरी जयंती के शुभ दिन पर आपको सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल पर जाकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर सीता-राम, लक्ष्मण जी और माता शबरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद घी का दीपक पूजा स्थल पर जलाएं और चंदन-अक्षत आदि अर्पित करें। इसके बाद 'ॐ रामाय नमः' मंत्र का जप करें। तत्पश्चात भगवान राम को बेर का भोग लगाएं। इसके बाद माता शबरी की कथा का पाठ करें। इसके अलावा आप रामायण में वर्णित शबरी प्रसंग का भी पाठ कर सकते हैं। पूजा के अंत में श्रीराम जी की आरती का पाठ करें और घर के लोगों में प्रसाद का वितरण करें। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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