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कौन है कीर्तिमुख जो शिव के आदेश पर खुद को ही निकल गया था, बुरी नजर से बचाता है इसका चेहरा

Who is Kirtimukha: कीर्तिमुख वो राक्षस है जिसका चेहरा लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर बुरी नजर से बचाव के लिए लगाते हैं। क्या आप जानते हैं कि इस राक्षस की उत्पत्ति भगवान शिव से ही हुई थी और शिव के कहने पर ही ये दानव खुद को खा गया था।

Written By: Laveena Sharma @laveena1693
Published : Nov 06, 2025 10:52 am IST, Updated : Nov 06, 2025 10:57 am IST
kirtimukh- India TV Hindi
Image Source : CANVA कौन है कीर्तिमुख जो शिव के आदेश पर खुद को ही निकल गया था

कई लोग अपने घर के बाहर एक भयानक सा दिखने वाला चेहरा लगाते हैं। जिसे बुरी नजर से बचाव के लिए लगाया जाता है। ये चेहरा कीर्तिमुख नामक राक्षस का है जिसे बुरी नजर से बचाने का वरदान प्राप्त हुआ था। कहते हैं इस राक्षस का चेहरा घर के बाहर लटकाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती क्योंकि ये नेगेटिव एनर्जी को पहले ही निगल लेता है। चलिए आपको बताते हैं इस भयंकर दिखने वाले राक्षस की पौराणिक कथा जिससे आप जानेंगे कि आखिर इसे कैसे मिला बुरी नजर से बचाने का वरदान।

कीर्तिमुख की कहानी: जानिए ये दानव कैसे बना बुरी नजर से बचाने वाला देवता

यूं तो आपने कई कथाएं सुनी होंगी लेकिन जिस पौराणिक कथा के बारे में हम आपको आज बताने जा रहे हैं उस बारे में शायद ही आपने सुना होगा। ये कथा है राक्षस कीर्तिमुख की। कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव जब ध्यान में लीन थे। तब अपनी शक्तियों के घमंड में चूर राहु ने महादेव के सिर पर विराजमान चंद्रमा को ग्रहण लगा दिया। ये देखकर शिव काफी क्रोधित हो गए और गुस्से में उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी। जिससे राहु को मारने के लिए कीर्तिमुख की उत्पत्ति हुई।

राहु को मारने के लिए हुआ था जन्म

कीर्तिमुख का मुख सिंह के समान था उसकी आंखों से आग निकल रही थी। भगवान शिव ने उसे राहु को खाने का आदेश दिया। तब राहु को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने भगवान शिव से क्षमा याचना की। जिसके बाद भोले भंडारी ने उसे मांफ कर दिया। ये देख कीर्तिमुख ने कहा कि भगवान मैं भूखा हूं क्योंकि आपने मुझे किसी को खाने के लिए उत्पन्न किया है अब मैं क्या करूं। तब शिव जी ने उसे यूं ही कह दिया कि तुम अपने ही शरीर को खा जाओ। 

भगवान शिव के कहने पर खुद को ही गया निगल

भगवान शिव को ये नहीं लगा था कि कीर्तिमुख इस आदेश का भी पालन करेगा। लेकिन उसने ऐसा ही किया शिव के आदेश पर उसने खुद को ही खा लिया। अब उसका सिर्फ मुंह बचा था। तब भगवान ने उसे रोका और कहा कि तुम्हारा मुख यशस्वी है, उसे मत खाओ। इस घटना के बाद से शिवजी ने उसे अपना सबसे प्रिय गण बना लिया। साथ ही भगवान ने उसे वरदान दिया कि जहां तुम विराजमान हो जाओगे वहां किसी भी प्रकार की नकारात्मकता का वास नहीं होगा।

ऐसे बना बुरी नजर से बचाने वाला देवता

कहते हैं शिव से वरदान पाने के बाद कीर्तिमुख का चेहरा शुभता, सुरक्षा और सकारात्मकता का प्रतीक हो गया। तभी से ऐसा माना जाता है कि जिस घर या दुकानों के बाहर कीर्तिमुख का चेहरा होता है वहां कोई नकारात्मक शक्ति प्रवेश नहीं कर पाती। ये सभी तरह की बुरी ऊर्जाओं को खा लेता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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