पर्थ वनडे का रिज़ल्ट वो नहीं रहा जिसके साथ कप्तान धोनी इस सिरीज़ का आग़ाज़ करना चाहते होंगे। धोनी के लिये चिंता की बात ये नहीं है कि भारत 309 रन बनाकर भी हार गया बल्कि जिस तरीके से हारा वह चिंता की बात है। कहते हैं ‘जो मारे सो मीर’ यानी पर्थ में अगर भारत जीत गया होता तो उसका आत्मविश्वास सांतवें आसमान पर होता। पांच मैचों की सिरीज़ में अभी चार मैच और खेले जाने हैं और ज़ाहिर है धोनी की नज़र ब्रिसबेन वनडे जीतकर श्रृंखला में वापसी करने की होगी लेकिन क्या ये इतना आसान है....?
बारिश कहीं खेल बिगाड़ ना दे
शुक्रवार को होने वाले मैच में बारिश की संभावना बताई गई है। अगर ऐसा होता है तो ‘डकवर्थ लुइस नियम’ के आधार पर मैच की नतीजा तय होगा और ज़ाहिर है बाद में बल्लेबाज़ी करने वाली टीम फायदे में रहेगी।
स्पिनर है तुरुप का इक्का,लेकिन क्या यह चाल सही रहेगी, देखना होगा

पर्थ वनडे में हार के बाद टीम इंडिया के वनडे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का स्पिनरों की विफलता पर निराश होना लाज़मी हैं क्योंकि वही टीम की सबसे बड़ी ताक़त हैं। वे कितनी बड़ी ताक़त हैं इसका अंदाज़ा धोनी के इस बयान से लगाया जा सकता है कि स्पिनर अगर चलते तो मैच टीम की झोली में आ सकता था। घर में दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ शानदार प्रदर्शन करने के बाद पर्थ वनडे में अश्विन और रविंद्र जडेजा बेरंग नज़र आए। ऐसे में स्पिनरों की कामयाबी का सेहरा साउथ अफ़्रीका के खिलाफ़ टेस्ट मैचों में इस्तेमाल की गई रैंक टर्नर पिच के सिर बांधना शायद ठीक भी हो।
हालंकि अश्विन ने आख़िर में टीम के लिए दो सफलताए ज़रुर हासिल की लेकिन तब तक मैच का नतीजा लगभग तय हो चुका था। धोनी ख़ैर मना रहे होंगे कि अश्विन और जडेजा ब्रिस्बेन में अच्छा प्रदर्शन कर दें वर्ना धोनी पर भी कुछ कम दबाव नहीं है।