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लोढा कमेटी ने बीसीसीआई से पूछे 80 सवाल, ज़्यादातर पर बोर्ड की चुप्पी

 Written By: India TV Sports Desk
 Published : May 19, 2015 10:35 am IST,  Updated : May 19, 2015 01:33 pm IST

नई दिल्ली: बीसीसाआई में सुधार की गुंजाइश ढूंढने की ज़िम्मेदारी निभा रहे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढा की अगुवाई वाली कमेटी ने बोर्ड के पदाधिकारियों से 80 से ज़्यादा सवालों पर

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लोढा कमेटी के 80 सवाल, बीसीसीआई के पास सिर्फ 35 जवाब

नई दिल्ली: बीसीसाआई में सुधार की गुंजाइश ढूंढने की ज़िम्मेदारी निभा रहे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढा की अगुवाई वाली कमेटी ने बोर्ड के पदाधिकारियों से 80 से ज़्यादा सवालों पर तलब किया है। इस कमेटी को बीसीसीआई में प्रशासनिक सुधार की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

कमेटी में पूर्व चीफ जस्टिस लोढा के अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अशोक भान और आरवी रवींद्रन भी शामिल हैं। कमेटी ने बीसीसीआई से अलग-अलग मुद्दों पर 80 से ज़्यादा सवाल पूछे, जिनमें हितों का टकराव, ऑडिट, खाते, वित्त और बोर्ड में पारदर्शिता जैसे मामले शामिल हैं।

ज़्यादातर सवालों पर बीसीसीआई की बोलती बंद

कमेटी ने बीसीसीआई के कई आला अधिकारियों को सवाल भेजे, लेकिन एक ही अधिकारी 82 सवालों में से सिर्फ 35 का जवाब दे पाया है। ‘हितों का टकराव’ शीर्षक के तहत एक सवाल ये पूछा गया है कि जब आईपीएल टीम का एक खिलाड़ी या टीम अधिकारी फ्रेंचाइजी के साथ काम करता हो या अन्य टीम का मालिक हो तो क्या बीसीसीआई इसे हितों का टकराव मानता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? बीसीसीआई की ओर से जवाब में कहा गया है, इंडिया सीमेंट्स-चेन्नई सुपरकिंग्स-एन श्रीनिवासन के संदर्भ में हितों के टकराव के मौजूदा मामले के सामने आने के बाद ही बोर्ड में इस तरह के मनमाने रवैये का पता चला है।

इस मुद्दे पर दो ऐसे सवाल हैं जिनका कोई जवाब नहीं दिया गया है। पहला सवाल यह है कि बीसीसीआई-आईपीएल और संबंधित पक्षों ने यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं कि इन संस्थाओं को चलाने वालों और इसके पेशेवर प्रबंधन से जुड़े लोगों के बीच हितों का टकराव नहीं हो। उपरोक्त संदर्भ में सूचना छुपाने पर किस तरह की सजा का प्रावधान है।

दूसरा सवाल ये है कि क्या यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं कि हितों का टकराव नहीं हो और बोर्ड-आईपीएल प्रतिनिधियों के रिश्तेदारों-सहयोगियों को इन अनुबंधों के लिए नहीं चुना जाए।

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