इंदौर: गुजरात ने रणजी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले के पांचवें और अंतिम दिन शनिवार को मौजूदा विजेता मुंबई को 5 विकेट से हराकर पहली बार खिताब पर कब्जा जमाया। गुजरात को जीत के लिए चौथी पारी में 312 रन चाहिए थे और टीम ने यह लक्ष्य 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया।
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गुजरात की इस ऐतिहासिक जीत के हीरो टीम के कप्तान पार्थिव पटेल रहे। पार्थिव ने पहली पारी में 90 रन बनाए थे जबकि दूसरी पारी में लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने शानदार सेंचुरी जमाई। पार्थिव ने 143 रन की अपनी पारी के लिए सिर्फ 196 गेंदे खेलीं और 24 बार गेंद को सीमारेखा से पार पहुंचाया। गुजरात इससे पहले 1950-51 में रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचा था। उस मैच में गुजरात होल्कर क्रिकेट टीम से हारा था और संयोग की बात यह रही कि इस बार उसने होल्कर स्टेडियम में ही यह जीत हासिल की। पार्थिव के अलावा मनप्रीत जुनेजा ने भी 54 रनों का अहम योगदान दिया।
46वीं बार फाइनल खेल रही मुंबई की पहली पारी 228 रनों पर ही सिमट गई थी। इसके बाद गुजरात ने पार्थिव (90) और मनप्रीत (77) की पारियों की मदद से अपनी पहली पारी में 328 रन बनाते हुए 100 रनों की बढ़त ले ली थी। मुंबई ने दूसरी पारी में 411 रन बनाते हुए गुजरात के सामने 312 रनों का लक्ष्य रखा था। चिराग गांधी (11 नॉटआउट) ने टीम के लिए विजयी शॉट लगाया। गांधी के साथ रुजुल भट्ट 27 रन बनाकर नॉटआउट रहे।