इंग्लैंड क्रिकेट के लिए दुखद खबर आई है। इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज केन शटलवर्थ का निधन हो गया है। केन ने 80 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। इंग्लैंड के लिए साल 1970 में टेस्ट डेब्यू करने वाले शटलवर्थ का करियर एक साल से भी कम का रहा। नवंबर 1970 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन में उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच खेला। इस मैच में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट चटकाने का बड़ा कारनामा किया। हालांकि, उनका करियर अगले साल समाप्त हो गया।
केन शटलवर्थ ने अपना आखिरी टेस्ट मैच जून 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ बर्मिंघम में खेला। इंग्लैंड के लिए वह सिर्फ 5 टेस्ट मैच ही खेल सके। इस दौरान उन्होंने 35.58 के औसत से 35 विकेट अपने नाम किए। वह अपने करियर में सिर्फ एक ODI मैच खेल पाए। जनवरी 1971 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में खेल गए इस ODI मैच में उन्होंने एक विकेट झटका।
फर्स्ट क्लास में झटके 600+ विकेट
13 नवंबर 1944 को लंकाशायर के सेंट हेलेन्स में जन्में केन शटलवर्थ का फर्स्ट क्लास करियर लंबा रहा। उन्होंने 1964 से 1980 तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और 239 मैचों में 623 विकेट अपने नाम किए। इस दौरान उन्होंने 2589 रन भी बनाए। लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 129 मैच खेलते हुए 174 विकेट चटकाए और 374 रन भी बनाए।
शटलवर्थ ने लंकाशायर और लीसेस्टरशायर के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला। उन्होंने लंकाशायर की ओर से खेलते हुए 22.92 की औसत से 484 विकेट अपने नाम किए और अपने करियर के बाद के सीजन में लीसेस्टरशायर के लिए 99 विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1968 में आया, जब उन्होंने लेटन में एसेक्स के खिलाफ 41 रन देकर 7 विकेट लिए और इस तरह उन्होंने उस सीजन 73 फर्स्ट क्लास विकेट अपनी झोली में किए। दो साल बाद उन्होंने 21 से ज्यादा के औसत से 74 विकेट लेकर इस आंकड़े को और बेहतर कर दिया।
अंपायरिंग में भी आजमाया हाथ
1970 के दशक में जब ODI क्रिकेट ने गति पकड़ी, तो शटलवर्थ की गेंदबाजी ने लंकाशायर की सफलता में अहम योगदान दिया, जिसमें 1970, 1971 और 1972 में जिलेट कप जीत की हैट्रिक और 1969 और 1970 में दो संडे लीग खिताब शामिल थे। गैरी सोबर्स के विकेट सहित 13 रन देकर 5 विकेट लेना उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, जो 1972 में ट्रेंट ब्रिज में आया था। साल 1975 में लीसेस्टरशायर जाने के बाद शटलवर्थ ने स्टैफोर्डशायर में लीग क्रिकेट में अपना करियर समाप्त किया और कुछ सालों तक इस पद पर रहने के बाद फर्स्ट क्लास अंपायर के रूप में खेल में वापसी की। साल 2021 में उन्हें लंकाशायर के हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया।
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