ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच इस समय पहला टेस्ट मुकाबला खेला जा रहा है। इस मैच में गेंदबाजों का दबदबा देखने को मिला है। जहां दोनों टीमों को मिलाकर अभी तक कुल 24 विकेट गिर चुके हैं। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 180 रन बनाए। इसके बाद वेस्टइंडीज की टीम 190 रन बना पाई। अब दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया के चार विकेट गिर चुके हैं और उसने 92 रन बना लिए हैं। इस मैच में अंपायर्स के कई फैसलों पर विवाद खड़ा हो गया है। आइए जानते हैं, इसके बारे में।
कैच जमीन से छुआ फिर भी दिया गया आउट
वेस्टइंडीज की पहली पारी के दौरान जब शे होप बल्लेबाजी कर रहे थे, तब ऑस्ट्रेलिया के ब्यू वेबस्टर ने उन्हें गेंदबाजी की। उनकी एक गेंद पर होप कट करना चाहते थे, लेकिन वह पूरी तरह से बीट हो गए और गेंद को विकेटकीपर एलेक्स कैरी ने लपक लिया। कैरी ने गेंद पकड़ने के लिए डाइव लगाई। ऐसा करते समय गेंद का एक हिस्सा जमीन से टकरा गया। इसके बाद भी थर्ड अंपायर ने उन्हें आउट दे दिया।
रोस्टन चेज ने लिया था रिव्यू
वेस्टइंडीज के कप्तान रोस्टन चेज ने पहली पारी में अच्छी बल्लेबाजी की थी। उन्होंने कुल 44 रन बनाए थे। लेकिन उनके आउट होने पर भी बड़ा विवाद खड़ हो गया। ऑस्ट्रेलिया के लिए 50वें ओवर में पैट कमिंस ने गेंदबाजी की। इस ओवर में बैटिंग वेस्टइंडीज के कप्तान चेज कर रहे थे। एक गेंद को चेज डिफेंड करना चाह रहे थे। लेकिन गेंद थोड़ी नीची रह गई। इसके बाद गेंद उनके पैड पर लग गई। फिर रोस्टन ने बिना समय गंवाए रिव्यू की मांग कर दी। थर्ड अंपायर द्वारा रिप्ले में देखने में पता चला कि पैड पर गेंद लगने से पहले अल्ट्रा एज में स्पाइक थी। लेकिन थर्ड अंपायर ने उन्हें आउट दिया। अंपायर के मुताबिक गेंद और बल्ले के बीच गैप था। जबकि इस बात को साफ नहीं किया गया कि अल्ट्रा एज में स्पाइक किस बात की थी।
पहली पारी के आधार पर वेस्टइंडीज को मिली थी बढ़त
इन दोनों बल्लेबाजों के आउट होने से वेस्टइंडीज की टीम को तगड़ा झटका लगा। वेस्टइंडीज की शुरुआत बहुत ही खराब रही थी। ओपनर क्रेग ब्रेथवेट और जॉन कैम्पबेल बड़ी पारियां नहीं खेल पाए। इसके बाद ब्रेंडन किंग और कीसी कार्टी भी फ्लॉप रहे। फिर शे होप और रोस्टन चेज ने कुछ देर विकेट पर टिकने की कोशिश की। चेज ने 44 रन बनाए। वहीं होप ने 48 रनों का योगदान दिया। वेस्टइंडीज ने पहली पारी के आधार पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 10 रनों की बढ़त हासिल की थी। अगर अंपायर्स का फैसला वेस्टइंडीज के हक में जाता, तो उनकी बढ़त बड़ी हो सकती थी। लेकिन ऐसा हो नहीं सका।