नई दिल्ली: नेपाल में शनिवार को आए भीषण भूकंप के बाद राजधानी काठमांडू में फंसी भारतीय अंडर-14 महिला फुटबाल टीम रविवार को सुरक्षित स्वदेश लौट आई। उन्हें सेना के एक विमान द्वारा स्वदेश लाया गया। अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) ने ट्वीट किया, "यू-14 महिला टीम सुरक्षित दिल्ली पहुंच गई।"
शनिवार को आए भूकंप के बाद काठमांडू में फंसी भारतीय टीम की वापसी में रविवार को आए भूकंप के ताजा झटकों के कारण विलंब हुआ।
इससे पहले भारतीय टीम को स्वदेश लाने वाला एक विमान त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से रविवार को 12.30 बजे उड़ान भरने वाला था, लेकिन भूकंप के ताजा झटकों के कारण विमान उड़ान नहीं भर सका और 18 सदस्यीय भारतीय टीम एवं पांच अधिकारियों को हवाई अड्डे पर ही विमान के उड़ान भरने का इंतजार करना पड़ा।
एआईएफएफ के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने रविवार को ट्वीट कर बताया कि सभी खिलाड़ी रविवार को दिल्ली में ही रुकेंगी और सोमवार को अपने-अपने घरों को रवाना होंगी।
भारत पहुंचने के तत्काल बाद टीम की मुख्य कोच रॉकी मेमल ने कहा, "मैं भगवान का शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने हमें सुरक्षित रखा। इस भूकंप ने हम सभी को डरा दिया था। मैं उन लोगों को भी धन्यवाद देती हूं जिन्होंने हमारे लिए प्रार्थना की।"
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को इससे पहले ट्वीट किया था कि भारतीय टीम को काठमांडू से निकालना भारत सरकार की प्राथमिकता में है।
भारतीय टीम एशियाई फुटबाल परिसंघ (एएफसी) रीजनल चैम्पियनशिप के दक्षिण एवं मध्य जोन में हिस्सा लेने के लिए काठमांडू गई थी।
भारतीय टीम को तीसरे-चौथे स्थान के लिए दशरथ स्टेडियम में शनिवार को अपराह्न् 1.0 बजे ईरान का सामना करना था। लेकिन निर्धारित समय से करीब एक घंटा पहले आए भीषण भूकंप से आयोजन स्थल के आस-पास का क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिसके कारण इस मैच सहित फाइनल मैच भी स्थगित करना पड़ा।
भारतीय टीम ने शनिवार की पूरी रात अपने होटल के बाहर होटल परिसर में ही खुले में गुजारी।
भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, काठमांडू का हवाई अड्डा रविवार को आए भूकंप के ताजा झटकों के बाद फिर से बंद कर दिया गया है। रविवार को आए झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.7 मापी गई।
रविवार को आए भूकंप के ताजा झटकों के बाद काठमांडू हवाई अड्डे से उड़ाने कई घंटों के लिए बंद रहीं और शाम 4.0 बजे के बाद ही शुरू हो सकीं।
गौरतलब है कि शविार को आए भूकंप से नेपाल में 2,200 से ज्यादा और भारत में करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है।