नई दिल्ली: केन्द्रीय खेल मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को कहा कि मंत्रालय दो बार के ओलम्पिक पदक विजेता सुशील कुमार के रियो ओलम्पिक में जाने के लिए की जाने वाली ट्रायल प्रक्रिया में दखलअंदाजी नहीं करेगा।
सुशील ने 2008 में बीजिंग ओलम्पिक में कांस्य और 2012 लंदन ओलम्पिक में 66 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था, जिसे 2014 में अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती महासंघ ने समाप्त कर दिया था, इसी कारण सुशील को 74 किलोग्राम वर्ग में आना पड़ा था।
जिसके कारण उन्हें नरसिंह यादव के साथ सीधा मुकाबला करना होगा जोकि उस वर्ग में भारत के शीर्ष पहलवान हैं। सुशील की चिंता उस समय और बढ़ गई थी जब नरसिंह ने 74 किलोग्राम वर्ग में विश्व चैम्पियनशिप में भारत को ओलम्पिक कोटा दिलाया था। सुशील कंधे में चोट के कारण इसमें हिस्सा नहीं ले सके थे।
रियो में नरसिंह का जाना तय है, ऐसे में सुशील हर कोशिश कर रहे हैं कि वह रियो में जा सकें। इसलिए वह खेल मंत्री सोनोवाल से मिलने और उनसे इस मामले में दखल देने की सिफारिश करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
सोनोवाल ने हालांकि कहा कि उनका मंत्रालय भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के कामकाज में दखल नहीं देगा और इस मामले को राष्ट्रीय महासंघ द्वारा ही सुलझाया जाना चाहिए। सोनोवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा, "जहां तक मंत्रालय का सवाल है, हम इस मामले में दखल नहीं देंगे।
डब्ल्यूएफआई एक स्वायत्त निकाय है और यह उन पर निर्भर है कि वह किसे ओलम्पिक में देश का प्रतिनिधित्तव करने देना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "अभी तक मेरी सुशील से मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन मंत्रालय का फैसला बदलेगा नहीं। हम दखल नहीं देंगे। हम चाहते हैं कि सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्तव करे।"
डब्ल्यूएफआई ने अभी तक इस मामले पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया है जिसके कारण तमाम तरह की अटकलें लागाई जा रही हैं। खबरों के मुताबिक बुधवार को डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह ने सुशील और नरसिंह के बीच किसी भी तरह के मुकाबले की संभावना से इनकार कर दिया था।