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अब पासवर्ड नहीं, दिल की धड़कन से लॉग-इन होगा आपका फोन, डेवलप हुई नई Vital ID टेक्नोलॉजी

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Apr 03, 2026 05:08 pm IST,  Updated : Apr 03, 2026 05:08 pm IST

स्मार्टफोन या अन्य डिवाइसेज को अब लॉग-इन या अनलॉक करने के लिए किसी फेस आईडी, बायोमैट्रिक्स या पासवर्ड की जरूरत नहीं होगी। वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक खोज ली है, जो दिल की धड़कन पर काम करती है।

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फोन में लॉग-इन का नया तरीका Image Source : UNSPLASH

अब आपको अपने स्मार्टफोन में पासवर्ड या बायोमैट्रिक लॉक रखने की जरूरत नहीं होगी। वैज्ञानिकों ने एक नए तरीके के लॉग-इन तकनीक की खोज की है, जो आपके दिल की धड़कन और सांसों की हलचल से डिवाइस को लॉक और अनलॉक कर सकती है। इसे Vital ID नाम दिया गया है, जो इंसानों के वाइटल के आधार पर डिवाइस को लॉक या अनलॉक करता है। इस नई तकनीक की सबसे अच्छी बात ये है कि इसके लिए डिवाइस के हार्डवेयर में कोई बड़ा बदलाव करने की जरूरत नहीं है। यह फोन में पहले से मौजूद सेंसर पर काम करता है।

क्या है Vital ID?

न्यू जर्सी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉज, टेम्पल यूनिवर्सिटी और टेक्सास A&M यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने मिलकर यह नया शोध किया है। Vital ID टेक्नोलॉजी से अलग-अलग ऐप्स, वेबसाइट्स आदि में लॉग-इन के तरीके पूरी तरह से बदल जाएंगे। स्टडी में पाया गया कि Vital ID टेक्नोलॉजी इंसानों के सांस लेने और दिल की धड़कन से पैदा होने वाले वाइब्रेशन का इस्तेमाल करती है। ये बारीक हलचल इंसानों की गर्दन से होते हुए उनके दिमाग तक पहुंचती है।

2025 ACM कॉन्फ्रेंस ऑन कम्प्यूटर एंड कम्युनिकेशंस सिक्योरिटी में इस नई इनोवेटिव टेक्नोलॉजी को शोकेस किया गया था। इसमें एक्सटेंडेड रियलिटी यानी (XR) के लिए डिजाइन किया गया है। हर इंसान के हड्डियों की बनावट और टिशू अलग होते हैं, जिसकी वजह से सबसे वाइटल्स भी अलग होते हैं।

फोन के सेंसर पर करता है काम

रिसर्चर्स ने पाया कि स्मार्टफोन, टैबलेट आदि में इसके लिए किसी खास हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं होती है। यह फोन या अन्य डिवाइस में मौजूद मोशन सेंसर पर काम करता है। इन दिनों लॉन्च होने वाले कई प्रीमियम फोन में मोशन सेंसर लगे होते हैं। इस सिस्टम को इनेबल करने के लिए किसी खास हार्डवेयर की जरूरत नहीं है। Vital ID को बस सॉफ्टवेयर से जोड़ने की जरूरत है। इसके बाद यह डिवाइस को लॉक या अनलॉक करने में सक्षम होगा।

98% एक्यूरेसी

Vital ID की टेस्टिंग के लिए रिसर्चर्स ने 10 महीने में 52 पार्टिशिपेंट्स पर XR हेडसेट का इस्तेमाल किया। इस दौरान सिस्टम ने 95 प्रतिशत से ज्यादा बार सही यूजर्स की पहचान की है। इस टेक्नोलॉजी ने 98 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में अनवेरिफाइड यूजर्स को स्वीकार नहीं किया है, जिसकी वजह से यह टेक्नोलॉजी आगे चलकर कामगर साबित हो सकती है। रिसर्च टीम ने एक फ्लिटरटिंग सिस्टम तैयार किया, जो सिर के हिलाने या जगह बदलने वाली रुकावटों को खत्म कर देगा। डिवाइस को केवल दिल की धड़कनों या सांस से जुड़ी कंपन्न पर ही लॉक या अनलॉक किया जा सके।

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