AI की वजह से हो रहे जॉब कट्स को लेकर हर सेक्टर में अफरा-तफरी का माहौल है। IT कंपनियों के शेयर धड़ाम हो रहे हैं। वहीं, सर्विस सेक्टर की कई कंपनियों में भी AI इंसानों को रिप्लेस करने के लिए तैयार है। कई ग्लोबल टेक लीडर्स ने एआई की वजह से हो रहे जॉब कट्स को लेकर अपनी राय रखी है। भारतीय टेक स्टार्टअप Zoho के CEO श्रीधर वेंबू ने भी सोशल मीडिया पर कुछ जॉब्स को लिस्ट किया है, जिसे एआई कभी रिप्लेस नहीं कर सकता है।
अपने X पोस्ट में वेंबू ने कहा कि AI उन लोगों के लिए खतरा बन सकता है, जिनकी खुद की कीमत की भावना, आर्थिक आउटपुट या दिमागी हालत से बहुत करीब से जुड़ी हुई है। हालांकि, एआई उन सेक्टर्स या पेशों को कभी नहीं छू सकता है जो पैशन से जुड़े हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों की केयरिंग, टीचिंग, खेती, वन संरक्षण, मंदिरों में किए जाने वाले पूजन और क्लासिकल म्यूजिक जैसे पेशों को एआई से कोई खतरा नहीं है।
वेंबू ने अपने पोस्ट में बताया कि इन व्यवसायों में एआई कभी नहीं घुस सकता है। Zoho CEO के पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट करके कहा कि पैशन वाले काम बिना आर्थिक मदद के कभी सर्वाइव नहीं कर सकते हैं। इस पर वेंबू ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पैशन वाले काम को केवल पैसा कमाने के लिए नहीं करना चाहिए। एआई या इससे जुड़ी तकनीक आने वाले समय में गुड्स और सर्विस के प्रोडक्शन को कई गुना तक बढ़ा सकती हैं, लेकिन सबसे वास्तविक दुनिया में सबसे बड़ी चिंता ये है कि लोग इसके आउटपुट को कंज्यूम कर सके। ऐसे में इकोनॉमिक सरप्लस को लेकर कोई पॉलिसी बनाने की जरूरत है।
जोहो ग्रुप के सीईओ ने कहा कि एक बार टेक्नोलॉजी जब बिना रोजगार के बहुत कुछ पैदा कर देगी, तो उस सरप्लस को बांटने के लिए राजनीतिक और सामाजिक समाधान की जरूत होगी। एआई को लेकर कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस टेक्नोलॉजी को केवल जॉब रिप्लेसमेंट की नजरों से नहीं देखना चाहिए। इसकी वजह से जिंदगी कितनी आसान बन जाती है, उस पर भी ध्यान रखना चाहिए। एआई को सही से ऑपरेट करवाने के लिए भी इंसानों की जरूरत होगी। एआई को किस तरह से इस्तेमाल किया जाए, इसके लिए भी इंसानी सोच की जरूरत पड़ने वाली है।
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