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बाराबंकी में लेखपाल-वकीलों में बवाल के बीच किसी ने SDM की गाड़ी पर थूका पान, छीछालेदर का वीडियो आया सामने

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jun 17, 2026 06:08 pm IST,  Updated : Jun 17, 2026 06:45 pm IST

Barabanki Lawyers vs Lekhpal Union: बाराबंकी की हैदरगढ़ तहसील में लेखपालों और वकीलों के बीच बवाल हो गया। वीडियो में दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे पर चीखते-चिल्लाते दिख रहे हैं। इस दौरान, किसी ने एसडीएम की गाड़ी पर पान की पीक थूक दी।

हैदरगढ़ तहसील में...- India TV Hindi
हैदरगढ़ तहसील में किसी ने SDM की सरकारी गाड़ी पर पान थूक दिया। Image Source : REPORTERS INPUT

Haidergarh Tehsil Protest: यूपी में बाराबंकी के हैदरगढ़ तहसील परिसर में माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब लेखपाल संघ और अधिवक्ता संघ के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी हुई। तहसील परिसर कुछ समय के लिए अखाड़े में तब्दील हो गया। इस दौरान, अधिवक्ताओं और लेखपालों के बीच एसडीएम राजेश विश्वकर्मा घिरे नजर आए। खबर ये भी आई कि इस दौरान किसी ने एसडीएम की सरकारी गाड़ी पर पान थूक दिया।

अधिवक्ता और लेखपाल संघ के लोग आए आमने-सामने

विवाद की वजह किसी लेखपाल की तरफ से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने आरोप था, जिसपर अधिवक्ताओं ने विरोध शुरू किया तो लेखपाल संघ के लोग भी मैदान में उतर आए। हालांकि, अधिवक्ता पहले से ही एसडीएम राजेश विश्वकर्मा के खिलाफ काम ना करने का आरोप लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर करते आ रहे हैं।

SDM की सरकारी गाड़ी पर थूक दिया पान

हंगामे के बीच किसी व्यक्ति ने एसडीएम की सरकारी गाड़ी पर कथित रूप से पान की पीक थूक दी, इस मामले पर भी हंगामा हो गया। इसके बाद, पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला।

वकीलों को अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई ना होने से शिकायत

एक अधिवक्ता ने कहा कि अपने पत्र में अधिकारी के कारनामों की पूरी लिस्ट दी थी। और ये हमसे इसीलिए दुश्मनी मानते हैं कि उसमें मैंने लिखा था कि किस काम के कितने पैसे लेते हैं। और उसकी हमने जांच की मांग की थी। लेकिन तहसील दिवस होते हुए भी अभी तक न हमारे प्रार्थना पत्रों की जांच की गई, न मेरी मांग मानी गई और ना ही इनको हटाया गया।

वकीलों को जाना चाहिए सक्षम अधिकारियों के पास- SDM

एसडीएम राजेश विश्वकर्मा ने कहा कि बार-बेंच का ऐसा सामंजस्य होता है कि कभी-कभी मनभेद हो जाता है। लेकिन वकील मेरे चार पत्रों में से भी किसी पत्र के क्रम में बातचीत के लिए नहीं आए। इन्होंने जिलाधिकारी से भी समय लिया वार्ता के लिए, लेकिन ये जिलाधिकारी के पास नहीं गए। मुझे लगता है कि अगर तहसील का जो अफसर है, उससे अगर कोई समस्या है तो सक्षम अधिकारी को बताना चाहिए।

जिलाधिकारी के सामने अपनी बात रखें वकील

राजेश विश्वकर्मा ने आगे कहा कि अगर आपको एसडीएम का ट्रांसफर चाहिए, तो वो जिलाधिकारी को करना है। आप जिलाधिकारी के समक्ष अपनी बात को रखते। अगर मैंने कुछ गलत किया है तो उसका प्रमाण भी आपको जिलाधिकारी के सामने रखना चाहिए था। और कोई भी उच्चाधिकारी ये नहीं चाहेगा कि किसी तहसील में हमारा अधिकारी कोई गलत कार्य करे, चूंकि ये सरकार की मंशा के भी विपरीत है।

(इनपुट- दीपक निर्भय)

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