1. Hindi News
  2. उत्तर प्रदेश
  3. कानपुर में फर्जी डिग्री घोटाला मामले में बड़ा खुलासा! 3 यूनिवर्सिटी की 287 डिग्रियां निकलीं फेक; ऐसे खुली पोल

कानपुर में फर्जी डिग्री घोटाला मामले में बड़ा खुलासा! 3 यूनिवर्सिटी की 287 डिग्रियां निकलीं फेक; ऐसे खुली पोल

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Mar 20, 2026 12:50 pm IST,  Updated : Mar 20, 2026 12:50 pm IST

फर्जी डिग्री रैकेट की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। SIT टीम को 287 डिग्रियां फर्जी मिली हैं। इनके आधिकारिक गजट और रिकॉर्ड में किसी प्रकार का कोई जिक्र नहीं मिला है।

kanpur fake marksheet- India TV Hindi
कानपुर में फर्जी डिग्री घोटाला मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। Image Source : REPORTERS INPUT

Kanpur Fake Degree Scam: यूपी में कानपुर पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की तरफ से चलाई जा रही फर्जी डिग्री और मार्कशीट रैकेट की जांच में एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के दौरान तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों से जुड़ी कुल 287 डिग्रियां और मार्कशीट फर्जी पाई गई हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या मणिपुर स्थित एशियन यूनिवर्सिटी की है, जहां 284 डिग्रियां और मार्कशीट फर्जी साबित हुई हैं।

आधिकारिक गजट में दर्ज नहीं 284 डिग्रियां

SIT के अनुसार, एशियन यूनिवर्सिटी की इन 284 डिग्रियों का किसी भी आधिकारिक गजट या रिकॉर्ड में कोई जिक्र नहीं मिला। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने SIT को उपलब्ध कराए गए रोल नंबर्स का मिलान करने पर पुष्टि की कि ये डिग्रियां कभी जारी ही नहीं की गई थीं। इससे इनके फर्जी होने की पूरी तरह पुष्टि हो गई। इसके अलावा, सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की 3 में से 2 डिग्रियां और अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर स्थित हिमालयन यूनिवर्सिटी की 1 डिग्री भी फर्जी निकली।

CSJM यूनिवर्सिटी को सौंपे गए दस्तावेज

इस जांच के दौरान SIT ने छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी, कानपुर के प्रबंधन को 371 मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट सौंप दिए हैं। एडीसीपी साउथ योगेश कुमार, जो इस SIT की अगुवाई कर रहे हैं, ने बताया कि CSJMU प्रशासन ने इन दस्तावेजों का सत्यापन 2-3 दिनों में पूरा करने का आश्वासन दिया है। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों की वैधता की गहन जांच कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि यह पूरा मामला 18 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब किदवई नगर पुलिस ने जूही गौशाला चौराहे के पास स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय पर छापेमारी की थी। वहां से 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों और यूपी बोर्ड से जुड़ी 900 से अधिक फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज बरामद हुए थे। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी जैसे पाठ्यक्रमों की डिग्रियां शामिल थीं। पुलिस ने मौके पर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

2012 से सक्रिय है फर्जी डिग्री गिरोह

जांच में सामने आया कि यह गिरोह 2012 से सक्रिय था और फर्जी दस्तावेज तैयार कर लाखों रुपये में बेच रहा था। गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा निकला, जो एमएससी (गणित) पास शिक्षक है। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस को शैलेंद्र के बैंक खातों में पिछले चार वर्षों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के सबूत मिले हैं।

बिना परीक्षा के दिलाते थे डिग्री

फिलहाल, फरार अन्य सदस्यों की तलाश में विभिन्न राज्यों में छापेमारी जारी है। SIT की टीमें कई विश्वविद्यालयों में पहुंचकर रिकॉर्ड जांच रही हैं। यह मामला शिक्षा व्यवस्था में गहरी साजिश की ओर इशारा करता है, जहां बिना परीक्षा दिए डिग्रियां उपलब्ध कराई जा रही थीं। पुलिस का कहना है कि जांच और गहराई से की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का जल्द से जल्द पर्दाफाश हो सके और दोषियों को सजा मिले। 

(इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)

ये भी पढ़ें- VIDEO: नाबालिग के अपहरण की जांच में ली 7 हजार की घूस, कैमरे में कैद हुई रिश्वतखोर महिला SI की करतूत

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। उत्तर प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।