महाराष्ट्र की बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीति तेज हो गई हैं। यहां अजित पवार के निधन के बाद उपचुनाव कराए जा रहे हैं। ऐसे में इस सीट को निर्विरोध रखने की अपील की गई थी। हालांकि बारामती उपचुनाव को लेकर महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर मतभेद सामने आने लगे हैं। कांग्रेस ने अपने सहयोगी एनसीपी (एसपी) के उस प्रस्ताव से दूरी बना ली है, जिसमें बारामती सीट को निर्विरोध रखने की अपील की गई है।
कांग्रेस ने किया विरोध
दरअसल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने साफ कहा कि उनकी पार्टी निर्विरोध चुनाव के पक्ष में नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में ऐसी कोई परंपरा नहीं रही है और पहले भी ऐसी परिस्थितियों में चुनाव लड़े गए हैं। बता दें कि बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद आई। इसके अलावा, बीजेपी विधायक शिवाजी कार्डिले के निधन के चलते राहुरी सीट खाली हुई है। निर्वाचन आयोग ने दोनों सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान की घोषणा की है।
सुप्रिया सुले ने रखा प्रस्ताव
इससे पहले एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले ने बारामती से अपनी पार्टी के चुनाव न लड़ने का ऐलान करते हुए अन्य दलों से भी सम्मान स्वरूप चुनाव से दूर रहने की अपील की थी। हालांकि, कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। कांग्रेस का कहना है कि इस मुद्दे पर महाविकास आघाड़ी के सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बावनकुले ने भी की सहमति की अपील
इधर, बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी सभी दलों से सहमति बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वे खुद हर्षवर्धन सपकाल से बात कर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करेंगे। अब देखने वाली बात ये होगी कि बारामती और राहुरी उपचुनाव को लेकर महाविकास आघाड़ी में सहमति बनती है या यह मतभेद और गहराते हैं।
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