कानपुर में चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में नया मोड़ आया है। हत्या के मामले में जेल भेजी गई बहू शालू को कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है। पुलिस की विवेचना में उसके खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने शालू के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर उसकी रिहाई का आदेश दिया। शाम करीब साढ़े 7 बजे वह जेल से रिहा हुई।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान अदालत या विवेचक की ओर से बुलाए जाने पर उसे उपस्थित होना होगा। शालू के भाई धीरज अरोड़ा ने कहा कि जिस पुलिस ने शुरुआत में उनकी बहन को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, उसी जांच में बाद में उसकी भूमिका सामने नहीं आई।
बेटे पर पिता की हत्या की साजिश रचने का आरोप
बता दें कि दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की 5 सितंबर को इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट के फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। कारोबारी पर चाकू से 17 वार किए गए थे। शुरुआती जांच में पुलिस ने उनकी बहू शालू को भी साजिश में शामिल मानते हुए गिरफ्तार किया था। मामले में जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने कारोबारी के बेटे सुब्रत मिनोचा को मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, सुब्रत ने पूछताछ में पिता की हत्या की साजिश रचने की बात स्वीकार की और बताया कि उसने अपने पुराने कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर के जरिए वारदात कराई। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि शालू को इस मामले में फंसाने के लिए कथित तौर पर उसके खिलाफ सबूत तैयार करने की कोशिश की गई थी।
पत्नी को फंसाने के लिए बनाई गई थी पूरी कहानी
पुलिस के मुताबिक, सुब्रत को डर था कि पिता की हत्या के बाद शक सीधे उस तक पहुंच सकता है। शुरुआत में उसने अपने चाचा पुनीत मिनोचा को मामले में फंसाने की योजना बनाई थी। बाद में उसने पत्नी शालू को साजिश का हिस्सा दिखाने की कोशिश की, जांच के अनुसार, हत्या से करीब 20 दिन पहले सुब्रत अपनी पत्नी शालू को लेकर परेड चौराहा पहुंचा था, जहां उसकी मुलाकात विशाल से हुई। इसके बाद तीनों कार से जेड स्क्वायर मॉल पहुंचे। सुब्रत कार में बैठा रहा, जबकि शालू और विशाल को साथ में शॉपिंग के लिए भेजा गया। पुलिस का कहना है कि इसके पीछे मकसद ऐसा माहौल तैयार करना था, जिससे बाद में मोबाइल लोकेशन या दूसरे साक्ष्यों में शालू और विशाल की साथ मौजूदगी दिखाई दे। इसी तरह दोनों को 80 फीट रोड स्थित चाय की दुकान और दूसरी जगहों पर भी साथ भेजा गया।
हत्या की रात बदला पूरा प्लान
5 सितंबर की रात वारदात को अंजाम देने से पहले सुब्रत ने विशाल से कई बार फोन पर बातचीत की। पुलिस के मुताबिक, सुब्रत ने विशाल को फ्लैट की चाबी दी थी। रात करीब 9:30 बजे वह पत्नी शालू को लेकर घर से निकल गया। इसके बाद विशाल और राजकिशोर फ्लैट में दाखिल हुए। पुलिस के मुताबिक, योजना कारोबारी की हत्या को इस तरह अंजाम देने की थी कि मामला सामान्य मौत जैसा लगे। दोनों आरोपी कमरे में छिपकर विनीत के सोने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन देर रात विनीत कमरे में पहुंचे और लाइट जलाते ही उनकी नजर विशाल पर पड़ गई। पुलिस के अनुसार, विनीत ने विशाल को चोर समझकर शोर मचाया। इसके बाद घबराए विशाल ने चाकू से उन पर हमला कर दिया। पुलिस का दावा है कि विनीत पर 17 बार चाकू से वार किए गए। इसके बाद विशाल और राजकिशोर वहां से भाग निकले।
CCTV ने खोली साजिश की पहली कड़ी
वारदात के बाद अपार्टमेंट के बाहर लगे CCTV में दोनों आरोपियों की गतिविधियां सामने आईं। पुलिस ने इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाई और विशाल तक पहुंची। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान विशाल ने शालू का नाम लिया। इसके बाद शुरुआती जांच में शालू की भूमिका संदिग्ध मानी गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बाद की जांच में पुलिस को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाला पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने शालू को मामले से बाहर करते हुए उसके पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।
सुब्रत और विशाल से आमना-सामना कराया तो खुलने लगी परतें
पुलिस के मुताबिक, कस्टडी रिमांड के दौरान सुब्रत और विशाल को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। दोनों के बयानों में विरोधाभास मिलने के बाद पुलिस ने साजिश की दिशा में दोबारा जांच की। पूछताछ में सुब्रत पर हत्या की साजिश रचने और पत्नी को फंसाने के लिए कहानी तैयार करने का आरोप सामने आया। पुलिस के अनुसार, सुब्रत ने पिता की हत्या की योजना, विशाल को शामिल करने और बाद में पत्नी शालू का नाम सामने लाने की बात बताई।
चाचा बोले- समझ नहीं आया मुझे क्यों फंसाना चाहता था
मामले में सुब्रत के चाचा पुनीत मिनोचा का नाम भी सामने आया था। पुनीत ने कहा कि वह पिछले 37 साल से अपने बड़े भाई विनीत से अलग रह रहे हैं और नवाबगंज के सिग्नेचर सिटी में रहते हैं। उनका निर्माण कारोबार है, पुनीत के मुताबिक, उनकी विनीत से मुलाकातें भी कम होती थीं और दोनों के बीच किसी तरह का विवाद नहीं था। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आया कि सुब्रत उन्हें इस मामले में क्यों फंसाना चाहता था।
बेटे के बयान ने मामले को और उलझाया
पुलिस के सामने सुब्रत ने पिता के खिलाफ नाराजगी की बात कही थी। उसने दावा किया था कि पिता के कई महिलाओं से संबंध थे और उसे डर था कि भविष्य में संपत्ति को लेकर कोई विवाद खड़ा हो सकता है। उसने अपने ऊपर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज होने और पिता से आर्थिक मदद नहीं मिलने की बात भी कही। सुब्रत ने पुलिस को यह भी बताया था कि शालू के जेल जाने के बाद उसे अपराधबोध हुआ और अगर पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं करती तो वह आत्महत्या कर लेता। हालांकि, उसके इन बयानों और पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के रिकॉर्ड और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी। फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद शालू की रिहाई का रास्ता साफ हो गया, जबकि उसके पति सुब्रत पर पिता की हत्या की साजिश रचने का मुकदमा आगे चलेगा।
(रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव)
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