लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के आरोपी सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला की अग्रिम जमानत जिला जज मलखान सिंह ने बीते शनिवार को खारिज कर दी है। इस अग्निकांड में 15 लोगों की जलकर हुई मौत की वजह नियम-कानूनों को ताक पर रखकर बनाई गई वह बिल्डिंग थी, जिसमें आरोपी सुरेंद्र शुक्ला की हिस्सेदारी है।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता देख खारिज की अग्रिम जमानत की याचिका
अदालत ने कहा, 'मामले में लगाए गए आरोप परिसर को जरूरी कानूनी मंजूरी और सुरक्षा नियमों का पालन किए बिना संचालित करने से जुड़े हैं।' कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष की ओर से जो जानकारियां रिकॉर्ड पर रखी गई हैं, वे सभी इस अपराध में आरोपी की भूमिका को दर्शाती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की जाती है।
अग्निकांड में जिंदा जलकर हुई थी 15 लोगों की मौत
गौरतलब है कि लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून, 2026 को तीन मंजिल की एक व्यावसायिक इमारत में आग लग गई थी और उसमें झुलसकर कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना में 7 अन्य लोग जख्मी भी हो गए थे।
हादसे के वक्त रोते-बिलखते नजर आए थे परिजन
जान लें कि पुरनिया बाजार से कुछ ही दूरी पर मौजूद यह बिल्डिंग अलीगंज के पॉश रिहायशी क्षेत्र में है, जहां कैफे और कोचिंग सेंटर जैसे स्थान हैं। आग लगने के वक्त बिल्डिंग के अंदर मौजूद रहे युवकों और युवतियों के रिश्तेदार घटनास्थल के पास खड़े होकर रोते-बिलखते नजर आए थे। वे अधिकारियों से बिल्डिंग के अंदर जाने की गुहार लगाते नजर आए थे। लखनऊ अग्निकांड मामले में 19 इंजीनियर्स और 6 PCS अधिकारियों की लापरवाही सामने आई थी। LDA की जांच रिपोर्ट में इन सभी पर कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
सीएम योगी ने कही थी दोषियों को सजा दिलाने की बात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अग्निकांड की घटना की खबर मिलने के बाद अपना अलीगढ़ का दौरा बीच में ही छोड़कर लखनऊ लौट आए थे। योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि इस केस की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलवाई जाएगी। PM मोदी ने भी लखनऊ में हुए इस अग्निकांड पर गहरा दुख जताया था। प्रधानमंत्री मोदी ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद की घोषणा भी की थी।
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