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VIDEO: गंदे आचरण करने वाले को सही उपदेश दो तो उन्हें बुरा लगेगा: प्रेमानंद महाराज

 Published : Aug 05, 2025 02:25 pm IST,  Updated : Aug 05, 2025 03:02 pm IST

प्रेमानंद महाराज के सत्संग और प्रवचन आध्यात्मिक गहराई के लिए प्रसिद्ध हैं। वह भक्तों के सवालों का सरलता से जवाब देते हैं। प्रेमानंद महाराज ने 'माया' के बारे में अपने भक्तों को बहुत ही साधारण तरीके समझाया है।

हिंदू संत एवं आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज- India TV Hindi
हिंदू संत एवं आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज Image Source : REPORTER INPUT

वृंदावन के प्रमुख हिंदू संत और आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के सत्संग के वीडियो जमकर वायरल होते हैं। एक वीडियो में प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि भारत की जनसंख्या 1 अरब 40 करोड़ के आसपास है। अब उनमें से ऐसे कितने लोग हैं, जो अध्यात्म में चलते हैं। चलने वालों में ऐसे कितने हैं, जो सही चल पाते हैं। सही चलने वालों में ऐसे कितने हैं, जो पहुंच पाते हैं। ये बहुत कठिन भगवान की माया का चरित्र रचा हुआ है। हम इसी में राजी हैं।

कीड़े को अमृतकुंड में डाले तो पसंद नहीं आएगा

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जैसे नाली का कीड़ा, नाली में ही सुख का अनुभव करता है। कीड़े को अमृतकुंड में डाले तो उसे पसंद नहीं आएगा। ऐसे जो गंदे आचरण कर रहे हैं न, उनको सही बात उपदेश करो तो उन्हें बुरा लगेगा। उनको अच्छा नहीं लगेगा। जैसे आप सब बच्चे हो, यहां आए हो तो सुधरने के लिए न, हम कड़ुआ भी बोलेंगे। तुम गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड बनाना बंद करो, तुम कोई नशा मत करो, अपने माता-पिता की आज्ञा में रहो। 

कैसे जानोगे कि अच्छाई क्या और बुराई क्या है?

अब इसी को बुरा मानो तो अगर संतजन तुम्हें उपदेश नहीं करेंगे तो शास्त्रों तक तुम्हारी पहुंच नहीं है। तुम कैसे जानोगे कि अच्छाई क्या है और बुराई क्या है? नए बच्चे हो, संसार में आए हो। तुमको लग रहा है कि सुख चाहिए। अब सुख व्यसन में, विचार में, गंदे व्यवहार में है। यही सब तुम्हें डिप्रेशन में ले जाएगा। यही तुम्हें सुसाइड करने के लिए प्रेरित करेगा। ऐसी घटनाएं बन जाएंगी। वही तुम्हें नाना प्रकार के आचरणों में फंसा करके जेल पहुंचाएगा। 

क्या है माया?

उन्होंने ने कहा कि संत, सद्गुरु और शास्त्र... इनकी बातों का मनन करें।  तो माया है ही नहीं। 'मा माने नहीं, या माने जो' मतलब जो है ही नहीं, लेकिन अपना कमाल कर जाती है। बड़े-बड़े लोगों को भ्रष्ट कर देती है। ये है भगवान की माया। भक्तों से प्रेमानंद ने पूछा, 'आप बताओ माया कहां है? आप माया हो, हम माया हैं। हमारा अलग नाम है। आपका अलग स्वरूप है। आप और हमारे बीच के जो आचरण हैं,  यदि वो गलत हो गए तो माया हो गई।'

प्रेमानंद ने भक्ति का बताया मतलब

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा, 'अभी आप जब यहां से निकलेंगे। तो आप से कहा जाएगा कि क्या आप माया से मिलकर आ रहे हो। तब आप कहोगे कि हम तो भक्ति का आनंद लेकर आ रहे हैं।  जब हम चार लोग मिलकर अच्छी वार्ता करते हैं तो ये भक्ति बन जाती है। जब बुरी वार्ता करते हैं तो वही माया बन जाती है। बस इतना अंतर है। भगवान ने इसीलिए दोनों पक्ष रखे हैं।'

भगवान ने अपनी श्रष्टि में सबकुछ बनाया

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि बाजार तभी अच्छी मानी जाएगी, जब उसमें हर सामान मिले। अगर केवल मिठाई-मिठाई ही मिले, कोई अगर कह दे कि भगवान ने मिर्च क्यों बनाई? नहीं मिर्च की भी जरूरत है। हर चीज की जरूरत है। भगवान ने अपनी श्रष्टि में सबकुछ बनाया है।  अब हमको क्या पसंद है? हमको धर्म पसंद है कि अधर्म पसंद है। पाप पसंद है कि पुण्य पसंद है। बस हमको सुधरना है। भगवान से शिकायत नहीं करनी है कि माया क्यों बनाई है?

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये सब माया ही है। ये जो आप देख रहे हो। आप का रूप भगवान न बनाते, आपका हाथ भगवान न बनाते। आपके नाक न बनाते, आपके आंख न बनाते तो बड़ा निषेधात्मक है। सोचो जिसके आंख नहीं है। एक मिनट आंख बंद करके देखो। आपको जीवन भर ऐसा रहना पड़े तो आपको कैसा लगेगा? एक घबराहट पैदा हो जाती है। 

 कर्मों के अनुसार ही सबकुछ मिलता है- प्रेमानंद

अंत में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अच्छी-अच्छी बातें... भगवत की चर्चा हो रही है। हमारे कान से सुनाई ही नहीं दे रहा है। ऐसे में भी घबराहट होती है। इसलिए भगवान ने हम पर कृपा की है। कर्मों के अनुसार ही ये मिलता है। हमें कृपा की भगवान ने कि इस जन्म में मानव देह स्वस्थ में दे रहे हैं। जाओ अच्छे कर्म करो, परोपकार करो और भजन करके मेरे को प्राप्त हो जाओ। अच्छे बनने के लिए हमें चांस मिला है, क्योंकि हम सुअर बनकर अच्छे नहीं बन सकते हैं। हम कुत्ता बनकर अच्छे नहीं बन सकते हैं। क्योंकि उसमें इतना विवेक नहीं है। हम मनुष्य बनकर अच्छा बन सकते हैं। इसलिए भगवान ने कृपा की है माया रचकर न कि गलती करके।

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