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SP विधायक का जाति प्रमाण निकला फर्जी, परिवार के 3 अन्य सदस्यों पर भी गिरी गाज

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published : Feb 11, 2026 07:00 pm IST, Updated : Feb 11, 2026 07:09 pm IST

बिलारी से समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद फहीम और उनके परिवार के तीन सदस्यों के जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इन्होंने गलत तरीके से 'झोजा' जाति के प्रमाण पत्र बनवाए हैं।

सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान- India TV Hindi
Image Source : REPORTER सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक मोहम्मद फहीम इरफान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने विधायक, उनके चाचा और दो चचेरी बहनों के पिछड़ी जाति (झोजा) के प्रमाण पत्रों को फर्जी पाते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद जिले की सियासत गरमा गई है। मामले पर पूर्व सपा संसद एसटी हसन ने कहा, "ऐसी सियासी नाइंसाफी किसी के साथ नहीं होनी चाहिए।"

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, मामले की शुरुआत 19 जुलाई 2024 को हुई, जब बिलारी तहसील के निवासी विश्वास यादव उर्फ लवली यादव ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विधायक मोहम्मद फहीम, उनके चाचा मोहम्मद उस्मान और उनकी दो बेटियों (फरहीन और समरीन) ने गलत तरीके से 'झोजा' जाति के प्रमाण पत्र बनवाए हैं, जबकि वे इस श्रेणी में नहीं आते।

शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी अनुज कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने मामले की गहन जांच की। समिति ने सभी पक्षों को सुना और साक्ष्यों का मिलान किया। जांच के बाद समिति इस नतीजे पर पहुंची कि मोहम्मद फहीम और उनका परिवार पिछड़ा वर्ग (झोजा जाति) में वर्गीकृत होने के मानक पूरे नहीं करता। साक्ष्यों और अभिलेखों के आधार पर उन्हें इस वर्ग का लाभ दिया जाना वैधानिक रूप से उचित नहीं है। इस आदेश पर जिलाधिकारी के साथ-साथ अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), उपजिलाधिकारी बिलारी और जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर हैं।

मामले पर एसटी हसन ने क्या कहा?

सपा विधायक के समर्थन में मुरादाबाद के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन खुलकर सामने आए। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा, "जहां तक हमें जानकारी है, उनके पास 2011 से झोजा जाति के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। यह पूरी तरह से सियासी नाइंसाफी है। हालांकि, यह जांच का विषय है और विधायक के पास उच्च फोरम या अदालत में अपील करने का पूरा हक है।"

(रिपोर्ट- राजीव शर्मा)

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