लखनऊ: यूपी के बजट सत्र में विपक्षी समाजवादी पार्टी के विधायकों के विरोध का अनोखा अंदाज देखा जा रहा है। सपा के कुछ विधायक जहां मंगलवार को सांकेतिक तौर पर 'अस्थि कलश' हाथ में लिए हुए थे वहीं विधायक अतुल प्रधान गले में हथकड़ी पहनकर विधानसभा पहुंचे। बुधवार को अतुल प्रधान गन्ना लेकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने गन्ना समर्थन मूल्य क़ो लेकर सरकार की नीतियों को विरोध किया।
गन्ना का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग
गन्ना लेकर बाइक से विधानसभा पहुंचे अतुल प्रधान ने कहा कि जब तक किसानों की स्थिति ठीक नहीं होगी, तब तक देश प्रगति नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की तरक़्क़ी में बीजेपी सबसे बड़ी बाधक है और किसानों से जो भी वादे किये थे, एक भी पूरा नहीं किया गया। गन्ना का मूल्य एक भी रुपया नहीं बढ़ा हैं। हमारी इस सरकार से माँग है की जल्द से जल्द किसानों के हित में 500 रूपये प्रति क्विंटल मूल्य घोषित करें।
सपा विधायकों ने सरकार को घेरा
बुधवार को विधानसभा में सपा विधायक संग्राम यादव ने बिजली विभाग के निजीकरण के मुद्दे पर अपनी बात रखी। इनके अलावा सपा के अन्य विधायकों ने अलग-अलग मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा।
‘जंजीरों’ में बंधे विधानसभा पहुंचे अतुल प्रधान
इससे पहले मेरठ के सरधना विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अतुल प्रधान मंगलवार को ‘जंजीरों’ में बंधे हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे थे। प्रधान ने कहा, “यह डबल इंजन वाली सरकार रोजगार देने में विफल रही है, जिससे लोग दूसरे देशों में अवैध रास्ते अपनाने को मजबूर हैं। सरकार का दावा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनके दोस्त हैं; क्या दोस्तों के बीच ऐसी हरकतें होती हैं? उन्होंने कहा कि हर राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति इस तरह से हथकड़ी लगाकर फिर से भारत न लौटे।
बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा में प्रवेश करने से पहले अतुल प्रधान ने सदन गेट पर विरोध प्रदर्शन करने के बाद जंजीरें हटा दीं। उन्होंने थोड़े समय के लिए भी जंजीरें पहनने की कठिनाई पर जोर दिया और अमेरिका से निर्वासित लोगों की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित किया।
अखिलेश यादव ने सीएम योगी को दिया जवाब
वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के राज्य विधानसभा में दिए गए बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यह बहुत स्पष्ट है कि सीएम को भाषा या प्रगति से कोई लेना-देना नहीं है। अगर आप रिकॉर्ड देखें तो 11 लाख प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं। कितने इंटरमीडिएट स्कूल खोले गए हैं? चाहे वह पॉलिटेक्निक हो, आईटीआई हो या इंजीनियरिंग - सरकार इनमें से कितने का ध्यान रख रही है? शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधारी जाए? समय-समय पर रिपोर्ट आती रही हैं...सरकार को सोचना चाहिए कि 11 लाख प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं, उनमें से ज़्यादातर यूपी में हैं।
यूपी में कल पेश होगा बजट
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि जन भावनाओं के अनुरूप बजट होगा। जनहितकारी बजट होगा। गरीब और मध्यम वर्ग का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा।
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