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लखनऊ में जालसाजों ने IAS का प्लाट दूसरे अधिकारी को बेच दिया, लगाया लाखों का चूना

Reported By : Vishal Pratap Singh Edited By : Mangal Yadav Published : Mar 29, 2025 05:36 pm IST, Updated : Mar 29, 2025 05:45 pm IST

रिटायर्ड आईएएस और मौजदा सीनियर आईएएस के प्लाट के साथ जिस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है वो वाकई चौकाने वाला है। एसटीएफ को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बड़ी गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

एलडीओ बिल्डिंग की फाइल फोटो- India TV Hindi
Image Source : LDO एलडीओ बिल्डिंग की फाइल फोटो

लखनऊः यूपी की राजधानी लखनऊ में लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी के खाली पड़े प्लॉट्स को गलत ढंग से बेचे जाने का खुलासा किया है। फर्जीवाड़ा से प्लॉट्स को बेचने वाले गिरोह के छह आरोपियों को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से लैपटॉप, प्रिंटर और करीब 25 फर्जी रजिट्री के पेपर्स बरामद किए गए हैं। जांच पता चला है कि गिरोह लखनऊ के उन खाली पड़े प्लॉट्स को टारगेट करता था जहां प्लाट मालिक लंबे समय तक प्लाट पर नहीं आते थे। 

परिवहन आयुक्त का घर भी बेचने की कोशिश

जालसाजों ने लखनऊ में ही तैनात रहे एक रिटायर्ड आईएएस का प्लाट बेच दिया। इसके बाद जालसाजों ने यूपी के मौजूदा परिवहन आयुक्त का गोमतीनगर के प्लाट को बेचने की पूरी तैयारी कर ली लेकिन ऐन वक़्त पर परिवहन आयुक्त को मामले की जानकारी हो गयी। शिकायत एसटीएफ  तक पहुंची जिसके बाद बड़ा खुलासा हुआ।

जालसाज कितना बेखौफ थे इस बात से अंदाज लगा सकते हैं कि लखनऊ में ही तैनात रहे सीनियर आईएएस बीएन सिह ने अपने प्लाट के बाहर पोताई करवाई है। लिखा गया है प्लाट बिकाऊ नहीं है, साथ ही अपना नाम, अपना फोन नंबर और अपनी जानकारी भी दे रखी है कि वो आईएएस  अधिकारी थे फिर भी प्लाट बेच दिया। 

एक अधिकारी का घर दूसरे अधिकारी को बेचा

 
दरअसल गिरोह का नंबर प्रॉपर्टी एजेंट के तौर पर वेबसाइट्स पर मौजूद है। ऐसे में भोपाल में तैनात सरकारी कर्मचारी भुवनेश कुमार गौतम को लखनऊ में प्लाट खरीदना था। प्रॉपर्टी एजेंट अमर सिंह उनके संपर्क में आता है और कहता है कि वो उनको प्लाट दिलवा देगा। बस उन्हें कुछ कैश अमाउंट भी देना होगा क्योंकि सर्कल रेट से ऊपर का पैसा कैश ही जाता है।

44 लाख रुपये का लगाया चूना

एडवांस में 45 लाख रुपए लेने के बाद बाकयदा 1.5 करोड़ में डील डन हो जाती है। प्रॉपर्टी के असली पेपर भी पीड़ित को दिखाए जाते हैं। प्लाट मालकिन का नकली आधार कार्ड भी दिखाया जाता है। बाकायदा रजिस्ट्री ऑफिस में जाकर रजिस्ट्री भी करवाई जाती है और फर्जी मालिक से रजिस्ट्री वाले दिन मुलाक़ात भी करवाई जाती है लेकिन जब प्लाट लेने के बाद पीड़ित प्लाट पर पूजा अर्चना करने जाते हैं तब पड़ोसियों के ज़रिये उन्हें पता लगता है कि वे ठगी के शिकार हो गए हैं। सभी जालसाज अपना फोन नंबर स्विच ऑफ कर देते हैं। 

लखनऊ विकास प्राधिकरण का उठा रहा बड़ा कदम
 
पूरे मामले में जिस तरह से प्रॉपर्टी के पेपर्स लखनऊ विकास प्राधिकरण से बाहर आए हैं, उसको लेकर प्राधिकरण बहुत गंभीर है। इसी वजह से प्राधिकरण वीसी ने विभाग के लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और शहर भर में एलडीए के खाली पड़े प्लॉट्स का सीमांकन करवाके उनपर बोर्ड भी लगवाए जाएंगे। साथ ही दलालों की प्राधिकरण में एंट्री न मिले इसको लेकर उपाय भी किए जा रहे हैं। 

 

 

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