Grasshopper Ears Location: दुनिया अजीबोगरीब जानवरों से भरी पड़ी है। लेकिन एक जीव ऐसा भी है जिसके कान, इंसानों की तरह सिर पर नहीं बल्कि पेट पर होते हैं। यह जीव कोई और नहीं बल्कि, अक्सर बरसात के मौसम में दिखने वाला टिड्डा है। हरे रंग का ये प्राणी अपनी शारीरिक संरचना में काफी अलग होता है। टिड्डों के कान उनके पेट पर होते हैं। इसकी प्रमुख वजह उसकी शारीरिक बनावट और Survival से जुड़ा हुआ है।
टिड्डे की शरीर की यह अनोखी बनावट उन्हें दुनिया में बेहतर तरीके से खुद को ढालने और शिकारियों से बचने में सहायता करती है। टिड्डे के पेट पर कान होने की कुछ प्रमुख वजह और विशेषताएं के बारे में जान लीजिए।
सुनने में ऐसे मदद करता है अनोखा कान
बता दें कि टिड्डों के पेट के पहले भाग के दोनों तरफ एक पतली झिल्ली होती है जिसको टिम्पैनल अंग या Tympanal Organ कहते हैं। जब ध्वनि की तरंगें इन झिल्लियों के संपर्क में हैं, तो वे कंपन करने लगती हैं। इस प्रकिया के जरिए टिड्डा आवाज को सुन पाता है।
सुरक्षा को बनाते हैं मजबूत
टिड्डे के पेट पर कानों का होना और उनसे जुड़े हवा से भरे थैले यानी Air Sacs, उसे ध्वनियों और कंपन के प्रति संवेदनशील बन देते हैं। इससे यह पक्षियों या अन्य शिकारियों की आहट को समय रहते पहचानने में मदद करता है।
प्रजनन में है सहायक
टिड्डे का श्रवण तंत्र इतना सटीक होता है कि वह नर टिड्डे मादा की आवाज सुनकर उसकी सटीक स्थिति को मालूम कर लेते हैं। इसके साथ ही, टिड्डे आवाज की पिच को समझकर दूसरे टिड्डे के साइज का अंदाजा भी लगा लेते हैं, इससे उन्हें लड़ाई से बचने में सहायता मिलती है।
पंखों के नीचे कान रहते हैं सुरक्षित
टिड्डे के ये कान साधारण तौर पर उसके पंखों के नीचे छिपे होते हैं, जो पतली झिल्ली के रूप में मौजूद Tympanal Organ को बाहरी चोट या गंदगी से सेफ रखते हैं। इसके साथ ही ध्वनि के संकेतों को पाने के लिए एक अनुकूल जगह देते हैं।