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'9 हजार रुपये में कक्षा-2 की किताबें!' महंगी स्टेशनरी से परेशान हुए पैरेंट्स, Viral Video पर​​ छिड़ी बहस

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Apr 09, 2026 08:49 am IST,  Updated : Apr 09, 2026 08:49 am IST

Viral Video : सोशल मीडिया पर महंगी शिक्षा और स्टेशनरी का मुद्दा गरमा गया है। एक वायरल वीडियो में पिता ने बताया कि, उन्होंने कक्षा-2 की किताबों के लिए नौ हजार रुपये खर्च किए हैं।

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महंगी स्टेशनरी का वीडियो वायरल। Image Source : X@BENARASIYAA

Viral Video : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वायरल वीडियो ने हंगामा मचा दिया है। चंडीगढ़ के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि उनके बच्चे की कक्षा 2 की किताबें, नोटबुक और स्टेशनरी के लिए स्कूल ने 9 हजार रुपये का बिल थमा दिया। सिर्फ छह नोटबुक, स्टिकर और कुछ बेसिक सामान पर इतनी बड़ी रकम देखकर पैरेंट्स हैरान हैं। वीडियो में पिता कैश काउंटर के बाहर बिल दिखाते हुए अपना दर्द बयां कर रहे हैं। वीडियो तेजी से वायरल हुआ और मंहगी स्टेशनरी से आहत हजारों पैरेंट्स ने अपनी कहानियां शेयर कीं।

एक्स पर शेयर किया गया वीडियो 

इस वीडियो को एक्स पर @Benarasiyaa नामक हैंडल से शेयर किया गया था। वीडियो में एक व्यक्ति अपने हाथों में किताबों और अन्य सामग्री का एक बड़ा बंडल लिए खड़ा दिखाई दे रहा है। वह माता-पिता को स्कूल का सामान खरीदते समय आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताता है। उन्होंने कहा, “मैं अपने बच्चों के लिए पाठ्यक्रम सामग्री लेने आया हूं। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने कहा था कि अभिभावक चंडीगढ़ में कहीं से भी, विशेष रूप से निजी स्कूलों के लिए आपूर्ति करने वाले किसी भी विक्रेता से अपने बच्चों की पाठ्यक्रम सामग्री खरीद सकते हैं। हालांकि, चंडीगढ़ के निजी स्कूलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है; सच्चाई यह है कि किसी विशेष स्कूल के लिए आवश्यक पाठ्यक्रम सामग्री केवल एक निर्धारित विक्रेता से ही प्राप्त की जा सकती है, कहीं और से नहीं। ज़रा इसे देखिए: मैं अपने बच्चों के लिए कम से कम 30 किलोग्राम का बोझ ढो रहा हूं। और कक्षा 2 की सामग्री का बिल देखिए: 9,000 रुपये।”

 

मदद की गुहार लगा रहे पैरेंट्स 

इस वीडियो में शख्स कहता है कि, “चाहे दरें बढ़ाई गई हों या उचित, आप आपत्ति नहीं कर सकते, न ही विरोध में आवाज उठा सकते हैं। आपको बिल पर छपी पूरी रकम चुकानी ही होगी, चाहे उसमें कोई भी आंकड़ा लिखा हो। न तो स्कूल और न ही शिक्षा विभाग इस मुद्दे पर कुछ बोल रहे हैं। मैं चंडीगढ़ प्रशासन से इस मामले का संज्ञान लेने की पुरजोर अपील करता हूं।”

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

जैसे-जैसे अधिक लोग इन पोस्टों को देख रहे हैं, कई लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। एक यूजर ने कहा, “इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जनता के धन और भरोसे को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जवाबदेही मायने रखती है।” दूसरे ने लिखा कि, “कॉपी को डिजिटाइज़ करके खुद ही प्रिंट क्यों नहीं कर लेते?” तीसरे ​ने लिखा कि, “हमने पहली कक्षा की किताबों के लिए 7,000 रुपये और यूनिफॉर्म के लिए 10,000 रुपये दिए।” एक यूजर ने बताया, “मेरा बच्चा लोअर केजी में है और किताबों की कीमत 4,000 डॉलर से अधिक है।”
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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